पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद बदलाव की बयार बहनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जो अपने गढ़ भवानीपुर में भी जीत हासिल नहीं कर पाईं, उनके आवास के बाहर से सुरक्षा घेरे को कम कर दिया गया है। सत्ता परिवर्तन के 24 घंटे बाद ही मुख्यमंत्री आवास के आसपास की सड़कों को आम जनता के लिए खोल दिया गया है। यह रास्ते बीते कई वर्षों से सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिबंधित क्षेत्र थे।

कालीघाट स्थित 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर सीएम ममता के आवास तक जाने वाले रास्ते पर वर्षों से मौजूद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तेजी से हटती नजर आई। हाजरा क्रॉसिंग के पास हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर लगी बैरिकेडिंग को हटा दिए गए हैं। वहीं, जो पुलिसकर्मी पहले लोगों की आवाजाही नियंत्रित करते थे और राहगीरों से पूछताछ करते थे वह सब वहां से गायब दिखाई दिए।

जनता के लिए बदलाव त्वरित और अप्रत्याशित

स्थानीय लोगों के लिए यह बदलाव त्वरित और अप्रत्याशित था। इस संबंध में मुख्यमंत्री के पड़ोसी ने बताया कि पहले हमें धीमा चलना पड़ता था, सवालों के जवाब देने पड़ते थे और आधार कार्ड साथ रखना होता था। हमारे रिश्तेदारों को भी चक्कर लगाकर आना पड़ता था। उन्हें परेशानी ना हो इस वजह से हम अक्सर उनके आने की जानकारी पहले ही पुलिस को दे देते थे। लेकिन अब वो पुलिस यहां हैं ही नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार हरीश चटर्जी स्ट्रीट को कालीघाट रोड से जोड़ने वाली संकरी गलियां जो लंबे समय से सुरक्षा के नाम पर बंद थीं उन्हें भी खोल दिया गया है। इस बदलाव के बाद वर्षों से बंद पड़े रास्ते फिर से आम लोगों के लिए चालू हो गए हैं।

यही नहीं, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर भी सुरक्षा कम कर दी गई है। वहीं, सेंट्रल कोलकाता की कैमैक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय के बाहर भी पुलिस तैनाती कम कर दी गई। 2016 में ममता बनर्जी के दूसरे कार्यकाल के बाद से बनी इस सुरक्षा व्यवस्था को हटाने का फैसला ऐसे राजनीतिक उलटफेर के बाद लिया गया, जिसकी कम ही लोगों को उम्मीद थी। 15 वर्षों से अधिक समय तक भवानीपुर तृणमूल कांग्रेस का अटूट गढ़ रहा, जहां चुनावी मुकाबले अक्सर औपचारिकता जैसे ही नजर आते थे।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में निर्णायक बदलाव ला दिया है। भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वर्चस्व को समाप्त कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह परिणाम क्षणिक लहर या सत्ता विरोधी लहर का नतीजा नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अभियान का परिणाम है जिसने विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे मतदान पैटर्न को पूरी तरह से बदल दिया है। पूरी खबर पढ़ें…