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दूसरे राहत पैकेज की घोषणा जल्द, MSME सेक्टर पर होगा जोर, PMO में हुई छह बड़ी बैठकें, वित्त और वाणिज्य मंत्री भी थे मौजूद

दूसरे वित्तीय राहत पैकेज के दायरे और इसकी राशि पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में छह से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। गुरुवार को हुई इन बैठकों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारण और वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए। (PIB/PTI Photo)

घातक कोरोना वायरस महामारी के प्रसार और लंबे समय से जारी लॉकडाउन के चलते देश में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसे में इन सभी क्षेत्रों को उबारने के लिए सरकार दूसरे राहत पैकेज की घोषणा पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इसमें सरकार का मुख्य तौर पर जोर होगा कि बड़े कॉर्पोरेट क्षेत्र के बजाय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी (MSME) सेक्टर पर ज्यादा जोर हो। दूसरे वित्तीय राहत पैकेज के दायरे और इसकी राशि पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में छह से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। गुरुवार को हुई इन बैठकों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारण और वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।

इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर मंत्रालय और विभाग बड़े पैमाने पर राजकोषीय पैकेज के लिए एक मजबूत रणनीति बनाने में जुटे हैं। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पैकेज में मुख्य ध्यान MSME के अलावा स्वास्थ्य देखभाल, वित्तीय क्षेत्र, गरीब और कमजोर वर्ग पर होगा। दूसरे राजकोषीय पैकेज पर चर्चा में शामिल सूत्रों ने कहा ऐसा मालूम होता है कि आम सहमति बन रही है कि उद्योग के भीतर MSMEs को ज्यादा फायदा नहीं हुआ है और अपने पहले पैकेज में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अब तक उठाए गए कदमों और वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित उपायों के बावजूद इस सेक्टर की पीड़ा जारी है।

एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने भी 24 अप्रैल को संकेत दिए थे कि एमएसएमई सेक्टर के लिए एक लाख करोड़ रुपए के रिवाल्विंग फंड की व्यवस्था करने की संभावना है। पता चला है कि पीएसयू को भी निर्देश दिए गए हैं कि पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एमएसएमई के बिलों का निपटान करे।

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इसके अलावा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को एक विस्तृत बैठक की। बैठक में रोजगार के अवसर बढ़ाने और विकास को बढ़ाने में खनन क्षेत्र के योगदान की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक पीएम मोदी ने निवेशकों को संभाले रखने और उनकी समस्याओं को हल करने, समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक केंद्र और राज्य सरकार की मंजूरी प्राप्त करने में मदद करने के लिए ‘अधिक सक्रिय दृष्टिकोण’ की वकालत की।

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मीटिंग में पीएम मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित साह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर और केंद्र सरकार के आला अधिकारी भी मौजूद थे। दरअसल ये बैठक भी ऐसे समय हुई है कि जब सरकार की योजना एमएसएमई और समाज के जरुरतमंद वर्गों के लिए राहत उपायों के लिए नए राहत पैकेज की घोषणा करने की है। ताकि उन्हें लॉकडाउन के प्रतिकूल आर्थिक प्रभावों से निपटने में मदद मिल सके।

पीएमओ ने एक बयान में बताया कि बैठक में चर्चा की गई कि देश में मौजूदा औद्योगिक भूमि/भूखंडों/संपदा में अधिक प्लग को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए एक योजना विकसित की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि 1.7 लाख करोड़ रुपए का पहला आर्थिक राहत पैकेज मुख्य रूप से गरीबों को सीधे नकद हस्तांतरण और किसानों को आय समर्थन पर केंद्रित था।

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