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रुच‍ि सोया की हरकतों पर सेबी को फ‍िर आपत्‍ति‍: ज‍िस कंपनी ने बैंकों का पैसा डुबोया, उसी को खरीदने के ल‍िए बैंकों ने रामदेव के पतंजल‍ि ट्रस्‍ट को द‍िया था लोन

रुच‍ि सोया का एफपीओ 28 मार्च को बंद होना था, लेक‍िन 30 मार्च तक भी बंद नहीं हुआ। इसल‍िए सेबी ने आपत्‍त‍ि जताई है।

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पतंजलि-रुचि सोया से जुड़े एफपीओ की लांचिंग से पहले मुंबई में मीडिया से रूबरू होते रामदेव। एक्सप्रेस फोटो अमित चक्रवर्ती।

बाबा रामदेव द्वारा प्रमोट की जा रही रुच‍ि सोया इंडस्‍ट्रीज ल‍िमिटेड एक बार फ‍िर चर्चा में है। रुच‍ि सोया 4300 करोड़ रुपए के एफपीओ (फॉलो-ऑन-पब्‍ल‍िक) ऑफर के साथ बाजार में आई थी। एफपीओ 28 मार्च को बंद होना था, लेक‍िन 30 मार्च को भी बंद नहीं हुआ। सेबी ने इसे वादाख‍िलाफी बताते हुए मुद्दा कंपनी के साथ उठाया है। स‍ितंबर 2021 में भी सेबी ने कंपनी को चेतावनी जारी की थी। तब बाबा रामदेव का एक वीड‍ियो सामने आया था। इसमें वह कथ‍ित रूप से रुच‍ि सोया के एफपीओ में न‍िवेश को करोड़पत‍ि बनने का मंत्र बता रहे थे। सेबी ने इसे एफपीओ का दुष्‍प्रचार बताते हुए रुच‍ि‍ सोया को चेतावनी जारी की थी।

रामदेव के ट्रस्‍ट पतंजल‍ि ने जब रुच‍ि सोया को खरीदा था, तब की कहानी भी द‍िलचस्‍प है। रुच‍ि सोया पर खुद बैंकों का करोड़ों रुपए का कर्ज था। इसके बावजूद उन्‍हीं बैंकों ने बाबा रामदेव के ट्रस्‍ट को रुच‍ि सोया को खरीदने के लि‍ए कर्ज दे द‍िया। पतंजलि की क्रेडिट रेटिंग खराब होने के बाद भी पंजाब नेशनल बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह ने रामदेव को 3300 करोड़ का लोन जारी कर दिया।

आउटलुक बिजनेस की एक रिपोर्ट के अनुसार रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए रामदेव को दिसंबर 2019 में लोन सेंक्शन किया गया। जबकि इसी साल अक्टूबर में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ICRA, CARE ने पतंजलि की रेटिंग को A+ से गिराकर BBB कर दिया था। ICRA ने पतंजलि आर्युवेद पर सवाल खड़े किए थे तो CARE का कहना था कि मार्च 2019 के आंकड़ों के मुताबिक रुचि सोया को खरीदने में रामदेव की 151% नेटवर्थ लगनी थी।

नवंबर 2019 में एक और रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने भी पतंजलि को उस समय झटका दिया जब उसने कहा कि रामदेव की कंपनियों की हालत ठीक नहीं है और रुचि सोया के अधिग्रहण का फैसला उसके लिए आत्मघाती भी साबित हो सकता है। ब्रिकवर्क ने नागपुर स्थित पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क की रेटिंग को गिराकर BBB+ कर दिया था। रेटिंग एजेंसी का मानना था कि पतंजलि का ढांचा सवालों के घेरे में है। उसके बोर्ड में राम भरत (रामदेव के भाई) और उनकी पत्नी जैसे लोग शामिल हैं।

स्टेट बैंक ने पतंजलि को 1300 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक ने 700 करोड़, यूनियन बैंक ने 600 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 400 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 300 करोड़ का लोन रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए जारी किया। बावजूद इसके कि स्टेट बैंक के 933, पीएनबी के 346, यूनियन बैंक के 149, सिंडिकेट बैंक के 147 और बैंक ऑफ बड़ौदा के 121 करोड़ के लोन नॉन परफार्मिंग असेट्स घोषित किए जा चुके थे। ये लोन रुचि सोया को जारी किया गया था।

रामदेव ने जब रुचि सोया का अधिग्रहण किया उससे काफी पलले यानि 2017 में कंपनी पर 12146 करोड़ का कर्ज था। इनमें से 9385 करोड़ रुपये नेशनलाइज्ड बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के थे। तब कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी में केस चल रहा था।2019 में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने जब रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए पतंजलि का 4350 करोड़ रुपये का प्लान मंजूर किया तब उन बैंकों ने भी रामदेव को लोन दिया जिनका पैसा रुचि सोया के पास डूब चुका था। 4350 करोड़ रुपये के अधिग्रहण प्लान के लिए बैंकों ने 3300 करोड़ रुपये रामदेव को दिए।

अधिग्रहण प्रस्ताव के मुताबिक बैंकों को 4053 करोड़ रुपये की रकम वापस की जानी थी। जबकि उनका रुचि सोया पर 9385 करोड़ रुपये बकाया था। यानि उन्हें अपनी डूबी रकम का 57 फीसदी हिस्सा ही मिलने वाला था। फिर भी उन्होंने रुच‍ि सोया के अध‍िग्रहण के ल‍िए कर्ज द‍िया। पतंजलि को वर्किंग कैपिटल के तौर पर इसके अलावा भी 17 सौ करोड़ रुपये जारी किए गए। 11 बैंकों के समूह ने ये रकम रामदेव के ग्रुप को दी। इसकी एवज में पतंजलि के चेयरमैन आचार्य बाल कृष्ण को रुचि सोया की 50 फीसदी हिस्सेदारी मिली तो कंपनी का सारा सामान और संपत्ति पतंजलि के पास चली गई।

सिंगापुर के डीबीएस बैंक को भारत के बैंकों के रवैये के उलट रुचि सोया के अधिग्रहण प्लान पर आपत्ति थी,लेकिन उसकी आपत्‍त‍ि का कोई असर नहीं हुआ। सिंगापुर के बैक का भी रुचि सोया पर लोन बकाया था। 2019 में पतंजलि ने जब रुचि सोया का अधिग्रहण किया था तो उसने 4350 करोड़ रुपये निवेश किए थे। आज आलम यह है क‍ि रुचि सोया का एफपीओ 3.6 गुना तक जा पहुंचा है।

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