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काशी महाकाल एक्सप्रेस के बी5 कोच की सीट नंबर 64 बन गया शिवजी का मंदिर, हाथ जोड़ते दिखे लोग

वाराणसी से इंदौर के बीच सप्ताह में तीन बार चलने वाली इस ट्रेन में भक्ति भाव वाली हल्की ध्वनी से संगीत बजेगा और यात्रियों को शाकाहारी खाना परोसा जाएगा।

Author वाराणसी | Published on: February 17, 2020 10:08 AM
काशी महाकाल एक्सप्रेस के बी5 कोच की सीट नंबर 64 बने भगवान शिव के मंदिर के आगे हाथ जोड़ते श्रद्धालु। (Photo: ANI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी से काशी महाकाल एक्सप्रेस को रवाना किया। इसमें एक सीट भगवान शिव के लिए भी आरक्षित है। यह एक्सप्रेस दो राज्यों के तीन ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करेगा। ट्रेन के बी5 कोच में सीट नंबर 64 के पास भगवान शिव का एक छोटा सा मंदिर बनाया गया है। इस मंदिर को रंगीन पेपर और फूल-मालाओं से सजाया गया है। कई श्रद्धालु इस मंदिर के समाने हाथ जोड़कर मत्था टेकते दिखे।

ट्रेन में भगवान शिव के लिए सीट आरक्षित करने ने नए विचार के बाद रेलवे प्रशासन इस पर विचार कर रहा है कि ट्रेन में स्थायी तौर पर ‘भोले बाबा’ के लिए एक सीट आरक्षित की जाए। यह ट्रेन इंदौर के निकट ओंकारेश्वर, उज्जैन में महाकालेश्वर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ को जोड़ेगी।

उत्तरी रेलवे के लिए प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि कोच संख्या बी5 की सीट संख्या 64 भगवान के लिए खाली की गई है। रेलवे ने आईआरसीटीसी संचालित तीसरी सेवा शुरू की है। यह ट्रेन उत्तर प्रदेश के वाराणसी से मध्य प्रदेश के इंदौर तक जाएगी।

कुमार ने कहा, ‘‘ ऐसा पहली बार हुआ है जब एक सीट भगवान शिव के लिए आरक्षित और खाली रखी गई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ सीट पर एक मंदिर भी बनाया गया है ताकि लोग इस बात से अवगत हों कि यह सीट मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल के लिए है।’’

कुमार ने कहा कि ऐसा स्थायी तौर पर करने के लिए विचार किया जा रहा है। वाराणसी से इंदौर के बीच सप्ताह में तीन बार चलने वाली इस ट्रेन में भक्ति भाव वाली हल्की ध्वनी से संगीत बजेगा और प्रत्येक कोच में दो निजी गार्ड होंगे और यात्रियों को शाकाहारी खाना परोसा जाएगा।

बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी और महाकाल की नगरी उज्जैन के बीच रविवार को आईआरसीटीसी द्वारा शुरू काशी महाकाल एक्सप्रेस के प्रथम प्रयागराज आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इलाहाबाद जंक्शन पर इस ट्रेन के प्रथम आगमन पर प्रयागराज की सांसद रीता बहुगुणा जोशी, कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर और प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता ने इसका स्वागत किया और ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर कानपुर के लिए रवाना किया।

काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन वाराणसी और इंदौर के बीच सप्ताह में दो दिन लखनऊ और कानपुर होकर जाएगी, जबकि एक दिन इलाहाबाद और कानपुर होकर जाएगी। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि इस ट्रेन का नियमित संचालन वाराणसी से 20 फरवरी, 2020 से प्रारंभ किया जायेगा। ट्रेन संख्या 82401 वाराणसी से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर रवाना होगी।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक मंगलवार और बृहस्पतिवार को यह ट्रेन (82401) सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर होते हुए इंदौर पहुंचेगी। वहीं 23 फरवरी, 2020 से ट्रेन संख्या 82403 प्रत्येक रविवार को वाराणसी से दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर रवाना होगी और जंघई, इलाहाबाद, कानपुर होते हुए इंदौर पहुंचेगी।

गुप्ता ने बताया कि इस ट्रेन में 9 तृतीय श्रेणी वातानुकूलित कोच, 2 जेनरेटर कार और एक पैंट्री कार सहित कुल 12 कोच लगाये गए हैं। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त सभी कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं और सभी बर्थ पर मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था की गयी है। साथ ही प्रत्येक यात्री के लिए यात्रा के दौरान 10 लाख रुपये का मानार्थ यात्रा बीमा की सुविधा भी है।
उन्होंने बताया कि इस ट्रेन में 120 दिन अग्रिम आरक्षण की सुविधा है तथा आरक्षण चार्ट तैयार होने के बाद और ट्रेन के प्रस्थान समय से पांच मिनट पूर्व तक आरक्षण की सुविधा प्राप्त होगी।

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