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एससी-एसटी रिजर्वेशन से क्रीमी लेयर को बाहर करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मोदी सरकार, 7 जजों की बेंच को केस सौंपने की दरख्वास्त

बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह मामला 7 जजों की बेंच को भेजने की अपील की। 2018 में 5 जजों की बेंच ने फैसला दिया था।

सुप्रीम कोर्ट।(फाइल फोटो)

केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि एससी/एसटी समुदाय के क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभों से बाहर रखने वाले 2018 के उसके आदेश को पुर्निवचार के लिए सात सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समृद्ध लोग यानी कि क्रीमी लेयर को कॉलेज में दाखिले तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

इस मुद्दे पर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एससी/एसटी की क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने या न रखने के पहलू पर दो सप्ताह बाद विचार किया जाएगा। समता आंदोलन समिति और पूर्व आईएएस अधिकारी ओ पी शुक्ला ने नयी याचिका दायर की है।

एक जनहित याचिका में ‘‘एससी/एसटी की क्रीमी लेयर की पहचान के लिए तर्कसंगत जांच करने और उन्हें एससी/एसटी की नॉन क्रीमी लेयर से अलग करने’’ का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह मामला 7 जजों की बेंच को भेजने की अपील की। 2018 में 5 जजों की बेंच ने फैसला दिया था।
(भाषा इनपुट्स)

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