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चीन में एससीओ सम्मेलन आज, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और आतंकवाद पर होगी चर्चा

भारत विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। पाकिस्तानी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी शिविरों का मुद्दा एससीओ के इस सम्मेलन में भारत उठाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकवाद, कारोबार व निवेश की चुनौतियों पर भारत का पक्ष रखेंगे। वे वैश्विक आतंकवादी गुटों के तंत्र के खिलाफ समन्वित क्षेत्रीय और वैश्विक कार्रवाई की प्रणाली तैयार करने की बात उठाएंगे। साथ ही एससीओ समूह के देशों के बीच कारोबार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी संपर्क की हिमायत करेंगे। भारत का जोर एससीओ के सदस्य देशों के बीच परस्पर सुरक्षा, आतंकवादी विरोधी अभियानों में सहयोग, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर है। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दो दिन की चीन यात्रा पर शनिवार को चीन के तटीय शहर क्विंगदाओ पहुंचेंगे। वहां पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। दोनों राष्ट्राध्यक्ष इस बैठक में समग्र द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे।

इस वार्ता में महत्त्वपूर्ण पहलु वुहान शिखर वार्ता की प्रगति की समीक्षा है, जिसमें सीमा पर तनाव घटाने के उपायों के तहत दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच संवाद बढ़ाने के उपाय तय किए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी चीन को यह प्रस्ताव दे सकते हैं कि भारत और चीन को सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। बेजिंग में भारत के राजदूत गौतम बंबावले के अनुसार, ‘दोनों देशों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि भारत-चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन चैन बना रहे। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए दोनों नेता बात करेंगे। उम्मीद है कि ऐसी सहमति बनने पर इसका असर न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर, बल्कि भारत प्रशांत क्षेत्र और एशिया प्रशांत क्षेत्र समेत पूरी दुनिया पर होगा।’ प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के पहले बेजिंग स्थित भारत राजदूत बंबावले ने चीन के सरकारी मीडिया को इंटरव्यू दिया है जिसका ब्योरा विदेश मंत्रालय ने जारी किया है। बंबावले का कहना है कि दोनों देशों के बीच यह समझ विकसित हो चुकी है कि भारत और चीन तरक्की और विकास में साझेदार हैं। दूसरे, दोनों देशों के बीच जितने असहमति के क्षेत्र हैं, उससे कहीं ज्यादा सहमतियों और परस्पर सहयोग वाले क्षेत्र हैं।

भारत पिछले साल चीन के प्रभुत्व वाले एससीओ का पूर्ण सदस्य बना है। बंबावले ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्राध्यक्षों के इस सम्मेलन के जरिए एससीओ समूह की राजनीति में और व्यापार से जुड़ी वार्ताओं में भारत का कद और दबदबा बढ़ेगा। क्विंगदाओ में प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी के साथ मुलाकात के अलावा कई अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं होनी हैं। उम्मीद की जा रही है कि मोदी दूसरे एससीओ देशों के नेताओं के साथ आधा दर्जन वार्ताएं करेंगे। बहरहाल , अभी आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कुछ नहीं कहा गया है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन के साथ मोदी की कोई मुलाकात होगी या नहीं।

‘रैट्स’ के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर: भारत एससीओ और उसकी क्षेत्रीय आतंकवादी निरोधी संरचना (रैट्स) के साथ सुरक्षा संबंधित सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है। रैट्स सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से काम करती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत संसाधनों से मालामाल मध्य एशियाई देशों तक पहुंच पाने के लिए चाबहार बंदरगाह परियोजना और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा जैसी संपर्क परियोजनाओं पर जोर दे रहा है। भारत का जोर अंतिम दस्तावेज में सरहद पार आतंकवाद पर अपनी चिंताओं को शामिल करने पर होगा।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा : भारत विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। पाकिस्तानी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी शिविरों का मुद्दा एससीओ के इस सम्मेलन में भारत उठाएगा। हाल के दिनों में सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं पर भारत सरकार के कई मंत्री और विदेश मंत्रालय के आला अधिकारी तीखी प्रतिक्रिया जता चुके हैं।

भूटान होकर तवांग से गुवाहाटी तक सड़क का प्रस्ताव : अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्र ने विदेश मंत्रालय को दक्षिणी भूटान से होकर तवांग और गुवाहाटी को जोड़ने वाली सड़क बनाने का प्रस्ताव सौंपा है। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक के बाद राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात की। मोदी की चीन यात्रा के एक दिन पहले अरुणाचल के राज्यपाल ने ये प्रस्ताव सौंपे हैं, जिनको लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी चीन और भूटान के अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। दिल्ली में राज्यपाल मिश्रा ने विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (उत्तरी) सुधाकर दालेहा से मिलकर प्रस्ताव सौंपा और नई सड़क की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि तवांग के लुमला और असम के गुवाहाटी को जोड़ने वाली मौजूदा सड़क भूटान सीमा के पास से गुजरती है और बर्फबारी व हिमस्खलन के दौरान वह बंद हो जाती है। प्रस्तावित मार्ग से दोनों स्थानों के बीच दूरी 119 किलोमीटर घट जाएगी। राज्यपाल ने वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल बीएस देव से भी भेंट की।

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