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बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई वैज्ञानिकों ने

कन्नड़ विचारक एमएम कलबुर्गी की हत्या सहित असहिष्णुता की हालिया घटनाओं पर चिंता जताते हुए वैज्ञानिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अनुरोध किया है कि वे ‘उपयुक्त कार्रवाई करें।..

Author चेन्नई | October 28, 2015 12:59 AM

कन्नड़ विचारक एमएम कलबुर्गी की हत्या सहित असहिष्णुता की हालिया घटनाओं पर चिंता जताते हुए वैज्ञानिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अनुरोध किया है कि वे ‘उपयुक्त कार्रवाई करें।’

यह उल्लेख करते हुए कि एक अत्यधिक ध्रुवीकृत समुदाय, परमाणु बम की तरह खतरनाक है, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से ‘मानवता विरोधी और सभ्यता विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील भी की है। उन्होंने कहा, हम वैज्ञानिक, निर्दोष लोगों और तर्कवादियों की हत्या का कारण बनी असिहष्णुता, ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक घृणा के संदर्भ में हाल की घटनाओं को लेकर चिंतित हैं।

राष्ट्रपति को सौंपे गए पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों में पुणे स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फार एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आइयूसीएए) के पूर्व निदेशक नरेश दधीच , इस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज (आइएमएस) के जी राजशेखरन शामिल हैं। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और हरीश चंद्र अनुसंधान संस्थान, इलाहाबाद के कुछ शिक्षाविद भी इसमें शामिल हैं।

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पत्र में राष्ट्रपति की हाल में लोगों को दी गई इस सलाह की प्रशंसा की गई है कि सभी तरह के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है, हम आप से इस घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार करने और उपयुक्त कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं ।

केंद्र और राज्य सरकारों व लोगों को जारी एक अन्य पत्र में उन्होंने ‘सांप्रदायिक नफरत और समाज के ध्रुवीकरण को रोकने’ की अपील करते हुए रेखांकित किया कि भारत एक बहुलतावादी देश है जहां हर किसी समुदाय के लिए जगह है।

इसमें कहा गया है, अत्यधिक ध्रुवीकृत समुदाय परमाणु बम की तरह खतरनाक होते हंै। यह किसी भी समय फट सकता है और देश को विकट अराजकता में धकेल सकता है। यह अत्यधिक अस्थिर माहौल है और इस विषमता को खत्म करने के लिए जो भी हमारे हाथ में हो, वह करना चाहिए और समाज को वैज्ञानिक भावना से जागृत करना चाहिए।

आवेदन की एक प्रति मंगलवार को मीडिया को जारी की गई। इसमें कहा गया, सरकार से अपील है कि वह इस बदअमनी को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई करे जिसके कारण गोमांस खाने वालों, अंधविश्वासों के खिलाफ खड़े समझदार लोगों, आरटीआइ कार्यकर्ताओं, भंडाफोड़ करने वालों और मानवीय मूल्यों वाले कई अन्य निर्दोष लोगों को शिकार बनाया जा रहा है।

आवेदन में कहा गया है, निर्दोष और प्रबुद्ध लोगों का केवल उत्पीड़न ही नहीं हो रहा बल्कि उन्हें मारा जा रहा है। ‘वर्तमान घटनाओं के खिलाफ’ विरोधस्वरूप साहित्य अकादेमी पुरस्कारों को लौटाए जाने का उल्लेख करते हुए बयान में कहा गया है कि वैज्ञानिक समुदाय ‘निष्क्रिय’ प्रतीत होता है। इसमें कहा गया है, लेकिन वैज्ञानिक भी समाज का हिस्सा हैं और आज की तरह का समय उनसे कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने और अपनी चिंता जाहिर करने का आह्वान करता है।

वैज्ञानिकों ने कहा:
अत्यधिक ध्रुवीकृत समुदाय परमाणु बम की तरह खतरनाक होते हंै। यह किसी भी समय फट सकता है और देश को विकट अराजकता में धकेल सकता है। यह अत्यधिक अस्थिर माहौल है और इस विषमता को खत्म करने के लिए जो भी हमारे हाथ में हो, वह करना चाहिए और समाज को वैज्ञानिक भावना से जागृत करना चाहिए।

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