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‘देवास के खिलाफ दुर्भावना के कारण पेश किया गया है CBI का आरोप-पत्र’

देवास मल्टीमीडिया ने आज आरोप लगाया कि उसके खिलाफ सीबीआई का आरोप-पत्र भारत सरकार का दुर्भावना से प्रेरित कदम है।

Author नई दिल्ली | August 13, 2016 01:10 am
इसरो के तत्कालीन चेयरमैन जी माधवन नायर

देवास मल्टीमीडिया ने आज आरोप लगाया कि उसके खिलाफ सीबीआई का आरोप-पत्र भारत सरकार का दुर्भावना से प्रेरित कदम है। सरकार ने यह कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि उसने देवास-एंट्रिक्स करार को समाप्त करने के खिलाफ अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल किया। सीबीआई ने कल देवास मल्टीमीडिया, उसके तत्कालीन सीईओ और तीन निदेशकों सहित भारतीय अंतरिक्ष विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है।

इनमें इसरो के तत्कालीन चेयरमैन जी माधवन नायर का नाम भी शामिल है। एजेंसी ने कंपनी सहित नौ आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार रोधक कानून के प्रावधानों के तहत मामला दायर किया है। देवास मल्टीमीडिया ने यहां जारी बयान में कहा कि उसने अभी आरोप-पत्र नहीं देखा है, इसलिए वह विशेषरूप से टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।

देवास के चेयरमैन लॉरेंस बाबियो ने कहा कि जो रपटें हमने देखी है, यह आरोप-पत्र भारत सरकार का दुर्भावना से प्रेरित ताजा कदम है, जो उसने देवास और उसके शेयरधारकों के खिलाफ उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि उसने गैरकानूनी तरीके से देवास-एंट्रिक्स करार को समाप्त करने के खिलाफ अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने कहा कि देखने वाली बात यह है कि आरोप-पत्र हेग की स्थायी पंचाट अदालत :पीसीए: न्यायाधिकरण ने एकमत से यह पाया कि भारत सरकार ने गैरकानूनी तरीके से देवास मारीशस के शेयरधारकों के निवेश को जब्त किया और भारत सरकार के कदम से ये शेयरधारक न्यायोचित और समानता के बर्ताव से वंचित हो गए।

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