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स्कूल शिक्षा अधियिनयम में संसोधन पर बरसी BJP

सरकार ने संशोधन के जरिए जितने भी शिक्षा और अभिभावक विरोधी प्रावधान किए हैं, भाजपा उनका हर स्तर पर खुलकर विरोध करेगी।

Author नई दिल्ली | November 23, 2015 1:19 AM

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015 के जरिए केजरीवाल सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस करने और निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों का शोषण करने के रास्ते को कानूनी जामा पहनाने की पूरी तैयारी कर ली है। ये संशोधन शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव पैदा करेंगे। यह मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने संशोधन के जरिए जितने भी शिक्षा और अभिभावक विरोधी प्रावधान किए हैं, भाजपा उनका हर स्तर पर खुलकर विरोध करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से मांग की कि वे प्रस्तावित संशोधनों को जनहित के नजरिए से देखकर उनमें आवश्यक बदलाव करें। गुप्ता ने बताया कि प्रस्तावित संशोधनों में धारा 10(1) में बदलाव करके सरकार ने निजी स्कूलों के अध्यापकों के शोषण करने के रास्ते को कानूनी रूप दे दिया है। अब तक सरकारी स्कूलों और निजी स्कूलों के अध्यापकों का वेतन एक समान था। धारा 10(1) में बदलाव करने से निजी स्कूलों के शिक्षकों का वेतन सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन से अलग तय करने का प्रावधान कर दिया गया है। अब स्कूलों को यह छूट होगी कि वे अपने स्कूल के अध्यापकों का वेतन मनमाने ढंग से तय कर सकेंगे। अगर शिक्षकों का वेतन बढ़ाना हुआ तो इसकी भरपाई फीस के जरिए की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून में धारा 16 (ए), 24, 27(ए), 27(बी), 28 जोड़कर अदालत का यह अधिकार कि वे किसी अभिभावक या संस्था आदि के जरिए स्कूलों की शिकायत प्राप्त होने पर उसकी जांच करके स्कूल को दंडित कर सकते थे, में बदलाव कर दिया गया है । अब यह अधिकार अदालतों से छीनकर शिक्षा निदेशक को दे दिया गया है, जो न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में सरकार की जबरिया दखलअंदाजी है। इससे स्कूल और शिक्षा विभाग आपस में मिलकर अभिभावकों का शोषण कर सकेंगे। स्कूलों की शिकायत के लिए संशोधन के जरिए जिस समिति को बनाने का प्रस्ताव किया गया है, उस समिति के सामने अब कोई शिकायत करने के लिए 20 अभिभावकों का साथ होना जरूरी कर दिया गया है। पहले कोई अकेला अभिभावक या अभिभावक संगठन स्कूलों की मनमानी पर अदालत जा सकता था। सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में यह अधिकार समाप्त कर दिया गया है। समिति तभी शिकायत दर्ज करेगी जब उसके पास कम से कम 20 अभिभावकों की संयुक्त शिकायत लिखित रूप में प्राप्त होगी। स्कूल अब कैपिटेशन फीस भी वसूल सकेंगे।

सरकार का यह कहना है कि जो संशोधन करने का प्रस्ताव है वह शिक्षा के अधिकार कानून के तहत किया गया है, लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि शिक्षा का अधिकार सिर्फ एक सीमा तक की शिक्षा के लिए ही है। उससे ज्यादा शिक्षा ग्रहण करने पर संशोधन अभिभावकों, छात्रों तथा शिक्षकों का शोषण करेगा। सरकार ने स्कूलों के लेखों का ऑडिट करने के लिए सरकार की ओर से ऑडिटर नियुक्त करने का फैसला किया है, लेकिन इनके वेतन का भार अभिभावक फीस के जरिए उठाएंगे। इस प्रकार फीस बढ़ाने का एक नया कानूनी रास्ता खोल दिया गया है। इन लेखा परीक्षकों पर सरकार कैसे अंकुश लगाएगी, इसका कोई जिक्र संशोधन में नहीं है। यदि लेखा परीक्षक स्कूलों के प्रबंधतंत्र से मिल जाएं तो उनको दंडित करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इस प्रकार दिल्ली सरकार ने 20 नवंबर, 2015 को सदन में दिल्ली स्कूल (लेखों की जांच व अधिक फीस की वापसी ) विधेयक, 2015 तथा दिल्ली स्कूल शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015 नाम से जो बिल पेश किए हैं, वे शिक्षा व्यवस्था, छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का भरपूर शोषण करने का प्रयास है । इनका सबको मिलकर विरोध करना होगा।

 

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