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दूसरे की पत्नी से संबंध पर सेना में भी हो सज़ा, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के याचिका की जांच करने के लिए बुधवार को सहमति व्यक्त की है। शीर्ष अदालत की एक बेंच ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अनुरोध किया कि वे केंद्र की याचिका पर स्पष्टीकरण जारी करने के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करें।

supremeसर्वोच्‍च न्‍यायालय का सांकेतिक फोटो।

सुप्रीम कोर्ट ने अडल्टरी व्यभिचार को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था। इसे लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सैन्य बलों में अडल्टरी को अपराध ही रहने दें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के याचिका की जांच करने के लिए बुधवार को सहमति व्यक्त की है। शीर्ष अदालत की एक बेंच ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अनुरोध किया कि वे केंद्र की याचिका पर स्पष्टीकरण जारी करने के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करें।

शीर्ष अदालत ने सितंबर 2018 के फैसले में व्यभिचार को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। कोर्ट ने अडल्टरी मामले में IPC की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया था। लेकिन कोर्ट ने कहा था कि यह अब भी तलाक के लिए एक आधार हो सकता है।

केंद्र ने अपनी दलील में कहा कि 2018 का फैसला सशस्त्र बलों पर लागू नहीं होना चाहिए। सरकार ने कहा कि सेना के उन जवानों के मन में हमेशा एक चिंता रहेगी जो अपने परिवार से दूर हैं। सशस्त्र बलों के भीतर व्यभिचार को अपराध ना मानना ‘अस्थिरता’ का कारण हो सकता है क्योंकि सैन्य कर्मी, परिवार से लंबी अवधि के लिए अलग रह सकते हैं। केंद्र ने कहा कि उसकी याचिका में जोसेफ शाइन की याचिका से संबंधित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

केंद्र ने अपनी याचिका में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 33 के अनुसार सशस्त्र बलों के सदस्यों को मौलिक अधिकार प्रतिबंधित हैं। 2018 में व्यभिचार को अपराध के दायरे से बाहर करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने और जस्टिस खानविलकर की ओर से फैसले को पढ़ते हुए कहा था कि ‘हम विवाह के खिलाफ अपराध से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 को असंवैधानिक घोषित करते हैं।’

अलग से अपना फैसला पढ़ते हुए न्यायमूर्ति नरीमन ने धारा 497 को पुरातनपंथी कानून बताते हुए जस्टिस मिश्रा और जस्टिस खानविलकर के फैसले के साथ सहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि धारा 497 समानता का अधिकार और महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करती है।


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अडल्टरी अपराध तो नहीं होगा, लेकिन अगर पति और पत्नी में से कोई अपने पार्टनर के व्यभिचार के कारण खुदकुशी करता है, तो सबूत पेश करने के बाद इसमें खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला चल सकता है। इसके साथ ही तलाक के लिए विवाहेतर संबंधों को आधार माना जाएगा।

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