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रंजीत सिन्हा पर लगे आरोपों की होगी जांच: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सीबीआइ के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा पर कोयला खदान आबंटन मामले की जांच को प्रभावित करने और इसमें दखल देने के आरोपों की जांच की जाएगी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी के लिए स्थगित करते हुए कहा- हमें […]

Author January 13, 2015 11:04 am
सीबीआइ के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा पर कोयला खदान आबंटन मामले की जांच को प्रभावित करने और इसमें दखल देने के आरोपों की जांच की जाएगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सीबीआइ के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा पर कोयला खदान आबंटन मामले की जांच को प्रभावित करने और इसमें दखल देने के आरोपों की जांच की जाएगी।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी के लिए स्थगित करते हुए कहा- हमें इस पर गौर करना ही होगा। या तो हमें आपसे (सीबीआइ) या फिर उनसे (गैरसरकारी संगठन के वकील) की बात से सहमत होना पडेÞगा। अदालत ने कहा कि उसी दिन गैर सरकारी संगठन और उसके वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ शपथ लेकर गलत बयान देने का आरोप लगाने वाली सिन्हा की अर्जी पर भी सुनवाई की जाएगी।

जांच एजंसी के पूर्व निदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि न्यायिक रिकार्ड से ही पता चलता है कि उनके खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं और सिर्फ इसलिए ऐसा नहीं हो सकता कि वे प्रशांत भूषण हैं किसी भी प्रकार के झूठ से बच निकलेंगे।

भूषण का कहना था कि तत्कालीन सीबीआइ निदेशक के आगंतुक रजिस्टर की प्रविष्टियों से स्पष्ट है कि वह पहुंच वाले आरोपियों और कोयला आबंटन मामले से जुडे विजय दर्डा, उनके पुत्र देवेंद्र दर्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय जैसे व्यक्तियों से मिलते रहे हैं और ऐसी स्थिति में अदालत की निगरानी वाले विशेष जांच दल से इस तथ्य की जांच कराने की जरूरत है कि क्या इसके बदले में कोई सौदा हुआ।

भूषण ने कहा कि अगर रिकार्ड में इतने अधिक साक्ष्य हैं कि यह व्यक्ति आरोपियों से मिलता रहा है और उसने जांच की प्रक्रिया को मोड़ने की कोशिश की है तो अदालत को यह पता लगाने की जरूरत है कि यह सज्जन किस तरह से दर्जनों बार मुलाकात करके जांच को प्रभावित करते थे।

सीबीआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण ने कहा कि भूषण के नोट में दिए गए ब्योरे में अनेक तथ्य सही नहीं हैं। इसमें उनके (शरण) बारे में भी दिया गया विवरण भी सही नहीं है। इस पर भूषण ने कहा कि इन सभी आरोपों की जांच अदालत द्वारा कोयला आबंटन घोटाले से संबंधित मुकदमों की सुनवाई कराने वाले नियुक्त विशेष लोक अभियोजक कर सकते हैं और शीर्ष अदालत उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्यवाही कर सकता है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई थी जब सिन्हा को इससे संबंधित मामलों से खुद को अलग रखने का निर्देश दिया गया था।

शरण ने कहा कि सीबीआइ पहले ही गैरसरकारी संगठन की दलील पर 17 सितंबर को सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब दाखिल कर चुकी है। सिन्हा के वकील विकास सिंह ने कहा कि वे भूषण द्वारा आगंतुक रजिस्टर की प्रविष्टियों को लेकर उठाए गए मुद्दे और उनके आरोपों पर बहस शुरू करेंगे।

गैर सरकारी संगठन का कहना है कि दिल्ली पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उसकी 25 नवंबर, 2014 की शिकायत पर अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है।

इसलिए सिन्हा द्वारा सीबीआइ के निदेशक के रूप में पद के कथित दुरुपयोग के मामले की अदालत की निगरानी में आरोपों की जांच की आवश्यकता है। भूषण ने कहा कि कोयला प्रकरण में विशेष लोक अभियोजक आरएस चीमा कई प्राथमिकियों में अनेक कंपनियों की अपराधिता की भूमिका का पता चलने के बावजूद मामला बंद करने के सिन्हा के फैसले से सहमत नहीं हैं।

जांच एजंसी ने इस आरोप से भी इनकार किया कि शीर्ष अदालत के कारण ही वह मामले की प्रगति की रिपोर्ट सीवीसी को सौंपने के लिए बाध्य हुई। जांच एजंसी ने एक आदेश का हवाला देते हुए दावा किया है कि उसने स्वेच्छा से ऐसा किया।

 

 

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