कोरोनाः ‘राष्ट्रीय संकट पर मूकदर्शक बने नहीं रह सकते’, बोला SC; रेमडेसिविर की कमी पर भी सरकारों से मांगे जवाब

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केन्द्र और आप सरकार से पूछा कि जब कोविड-19 रोगियों को व्यापक रूप से रेमडेसिविर दवा लेने की सलाह दी जा रही है तो फिर राष्ट्रीय राजधानी में इसकी किल्लत क्यों है।

Author Edited By सचिन शेखर April 27, 2021 3:55 PM
corona, hospital, new delhiकोरोना मरीज को स्ट्रेजर पर ले जाता कर्मचारी। दिल्ली का जीटीबी हॉस्पिटल। फोटो- रॉयटर्स

कोविड-19 मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘‘राष्ट्रीय संकट’’ बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह ऐसी स्थिति में मूक दर्शक बना नहीं रह सकता। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कोविड-19 के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने पर उसकी स्वत: संज्ञान सुनवाई का मतलब उच्च न्यायालय के मुकदमों को दबाना नहीं है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर महामारी की स्थिति पर नजर रखने के लिए बेहतर स्थिति में है।पीठ ने कहा कि कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है क्योंकि कुछ मामले राज्यों के बीच समन्वय से संबंधित हो सकते हैं।पीठ ने कहा, ‘‘हम पूरक भूमिका निभा रहे हैं, अगर उच्च न्यायालयों को क्षेत्रीय सीमाओं के कारण मुकदमों की सुनवाई में कोई दिक्कत होती है तो हम मदद करेंगे।’’

देश के कोविड-19 की मौजूदा लहर से जूझने के बीच, उच्चतम न्यायालय ने गंभीर स्थिति का गत बृहस्पतिवार को स्वत: संज्ञान लिया था और कहा था कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं समेत अन्य मुद्दों पर “राष्ट्रीय योजना” चाहता है।शीर्ष अदालत ने वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन को इलाज का ‘‘आवश्यक हिस्सा’’ बताते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि काफी ‘‘घबराहट’’ पैदा कर दी गई है जिसके कारण लोगों ने राहत के लिए अलग अलग उच्च न्यायालयों में याचिकायें दायर कीं।

इधर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केन्द्र और आप सरकार से पूछा कि जब कोविड-19 रोगियों को व्यापक रूप से रेमडेसिविर दवा लेने की सलाह दी जा रही है तो फिर राष्ट्रीय राजधानी में इसकी किल्लत क्यों है। केन्द्र सरकार ने जब बताया कि रेमडेसिविर का सेवन केवल अस्पतालों में किया जा सकता है तो अदालत ने कहा कि जब अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के लिये ऑक्सीजन और बिस्तर ही उपलब्ध नहीं है तो वे कैसे इस दवा का सेवन करेंगे।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत के औषधि महानियंत्रक को इस मामले में पक्षकार बनाते हुए उनके वकीलों को दिल्ली में दवा की किल्लत के बारे में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील अनुज अग्रवाल को भी ऐसा ही निर्देश दिया गया और अदालत ने इस मामले की सुनवाई भोजनावकाश के बाद के लिये स्थगित कर दी गई।

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