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फेयरनेस क्रीम से गोरे नहीं हुए तो कोर्ट क्या करे? हमारे पास और भी काम: SC

गुवाहाटी की डॉक्टर चंद्र लेखा ने सुप्रीम कोर्ट से कॉस्‍टमेटिक सर्जरी करने वाले क्‍लीनिक और कॉस्‍टमेटिक प्रॉडक्‍ट बनाने वाली कंपनियों पर लगाम कसने की मांग को लेकर डाली थी सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन।
Author नई दिल्‍ली | November 17, 2015 14:52 pm
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से पूछा कि वे बिना उचित गाइडलाइंस के इतना बड़ा लोन कैसे देते हैं।

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने कहा कि अगर मशहूर कंपनी की क्रीम लगाने से आप गोरे नहीं हुए तो सुप्रीम कोर्ट क्‍या कर सकता है? अगर हम ऐसी याचिकाएं सुनने लगे तो कल लोग ये कहते कोर्ट आ जाएंगे कि बाल उगाने वाले तेल से उनके बाल नहीं आए। हम ऐसे मामलों में गाइडलाइन जारी करने के लिए नहीं बैठे हैं। दत्तू ने यह बात गुवाहाटी की डॉक्टर चंद्र लेखा की याचिका खारिज करते हुए कही।

कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता ऐसे मामलों को लेकर कंज्‍यूमर कोर्ट लेकर जाएं। चंद्रलेखा ने अपनी पिटीशन में अपील की थी कि कॉस्मेटिक्स सर्जरी व अंगों को सुंदर बनाने का दावा करने वाले प्रॉडक्‍ट्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस जारी करे। उनका आरोप है कि कॉस्‍टेमिटक प्रॉडक्‍ट बनाने वाली कंपनियां लोगों को ठग रही हैं। इनके भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए और इससे संबंधित एक कानून भी बनना चाहिए। यह मामला चीफ जस्टिस एचएल दत्तू, जस्टिस शिवाकीर्ति सिंह और अमिताव रॉय की बेंच के पास गया था।

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