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NSA के तहत धरे गए थे ऐक्टिविस्ट, SC का आदेश- शाम 5 बजे तक करें रिहा; जानें- क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक्टिविस्ट एरेन्ड्रो लीचोम्बम को एक दिन भी हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। उसकी लगातार हिरासत अनुच्छेद 21 -जीने के अधिकार- का उल्लंघन करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत गिरफ्तार किए गए मणिपुर के एक्टिविस्ट लीचोम्बम को रिहा करने का आदेश दिया। (फोटोः ट्विवटर @janvisinghh)

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत गिरफ्तार किए गए मणिपुर के एक्टिविस्ट एरेन्ड्रो लीचोम्बम को रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने आदेश दिया कि उनको आज शाम 5 बजे से पहले रिहा किया जाए। लीचोम्बम को एक फेसबुक पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया गया था, जिसमें कहा गया था कि गोबर या गोमूत्र कोविड का इलाज नहीं होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक्टिविस्ट एरेन्ड्रो लीचोम्बम को एक दिन भी हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। उसकी लगातार हिरासत अनुच्छेद 21 -जीने के अधिकार- का उल्लंघन करती है। कोर्ट ने कहा है कि एक्टिविस्ट को आज शाम 5 बजे तक 1000 रुपये के निजी मुचलके के साथ रिहा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार को सोमवार शाम पांच बजे से पहले कार्यकर्ता की रिहाई के लिए मणिपुर सेंट्रल जेल को आदेश देने का निर्देश दिया।

लीचोम्बम 17 मई से हिरासत में हैं। उनको 13 मई को एक फेसबुक पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया गया था। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था- कोरोना का इलाज गोबर या गोमूत्र नहीं है। इसका इलाज साइंस और कॉमन सेंस है प्रोफेसर जी। ये बयान मणिपुर बीजेपी के अध्यक्ष, प्रोफेसर टिकेंद्र सिंह की मौत के संदर्भ में बताया जा रहा था। इस पोस्ट से नाराज कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद लीचोम्बम अरेस्ट हुए।

हालांकि, 17 मई को लीचोम्बम को स्थानीय कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद इंफाल वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीएम के आदेश पर NSA के तहत उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। एक्टिविस्ट लीचोम्बम के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसके बाद ये आदेश आया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से गुहार लगाई कि याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की जाए, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड ने स्पष्ट किया कि वो सोमवार को ही उसकी रिहाई का आदेश पारित करेगी। बेंच ने कहा कि लीचोम्बम इसके लिए रात भर जेल में नहीं रह सकते। बेंच ने कहा कि हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता को लगातार हिरासत में रखना जीवन और स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन होगा। हम अंतरिम आदेश के जरिए उसकी रिहाई का निर्देश देते हैं। उधर, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह अब मुआवजे के लिए दबाव बनाएंगे।

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