ताज़ा खबर
 

जज कूरियन का पीएम मोदी के डिनर में आने से इंकार, ईस्टर के दिन आयोजन पर उठाए सवाल

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा न्यायाधीशों के लिये आज आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की है। उन्होंने इस आयोजन और गुड फ्राइडे तथा सप्ताहांत ईस्टर के साथ न्यायाधीशों के सम्मेलन के समय में टकराव की वजह से इसमें शामिल होने में अपनी असमर्थता जताई है। […]

Author April 5, 2015 8:20 AM
कूरियन जोसेफ (बाएं), एच एल दत्तू (केंद्र में), जस्टिस विक्रमजीत सेन (दाएं)।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा न्यायाधीशों के लिये आज आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की है। उन्होंने इस आयोजन और गुड फ्राइडे तथा सप्ताहांत ईस्टर के साथ न्यायाधीशों के सम्मेलन के समय में टकराव की वजह से इसमें शामिल होने में अपनी असमर्थता जताई है।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने इससे पहले न्यायाधीशों का तीन दिवसीय सम्मेलन ईसाइयों के पवित्र सप्ताहांत में आयोजित करने पर प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू के समक्ष भी आपत्ति उठाई थी। न्यायमूर्ति जोसेफ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के साथ ही इन पवित्र दिनों के दौरान ऐसी बैठकों के आयोजन पर भी सवाल उठाया है।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने एक अप्रैल को यह पत्र प्रधानमंत्री को लिखा था। इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री निवास पर आज रात होने वाले भोज में आमंत्रित करने पर आभार प्रकट किया है। न्यायमूर्ति जोसेफ ने लिखा है, ‘‘मैं इस आयोजन में शामिल होने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर रहा हूं क्योंकि यह सम्मेलन गुड फ्राइडे कार्यक्रमों के दौरान ही आयोजित हो रहा है। गुड फ्राइडे हमारे लिये अत्यधिक धार्मिक महत्व का है। इसी दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था।’’

‘‘अत: हमारे लिये इस सप्ताहांत अपने माता पिता, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ इस धार्मिक तथा दूसरे समारोहों का हिस्सा बनना हमारी रीति है। इसलिए इन दिनों में मैं केरल में रहूंगा।’’

इस पत्र में न्यायमूर्ति जोसेफ ने आगे कहा है कि उन्होंने कुछ चिंताएं व्यक्त की हैं, जिनपर उन्हें लगता कि प्रधानमंत्री के विचार की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति जोसेफ ने लिखा है कि धर्म से इतर, दीवाली, होली, दशहरा, ईद, बकरीद, क्रिसमस, ईस्टर आदि आसपास के लोगों के साथ पर्व मनाने के महत्वपूर्ण दिन होते हैं। आप इस बात की सराहना करेंगे कि दीवाली, दशहरा, होली, ईद, बकरीद आदि के पवित्र दिनों पर कोई भी आयोजन नहीं किया जाता है, हालांकि इस अवधि में भी हम अवकाश रखते हैं।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने इसके बाद ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि विदेशों में सताये जाने के बाद यहूदी और पारसी भारत आये और उन्हें हिन्दू शासकों से सम्मान मिला। न्यायमूर्ति जोसेफ लिखते हैं कि हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों ने जाति एवं वर्ण से इतर अपनी बहुलवादी संस्कृति एवं लोकाचार में बहुत योगदान किया है। पूरी दुनिया हमारे महान राष्ट्र की धर्मनिरपेक्ष छवि, सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक समग्रता की खूबसूरती को निहारती है।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने प्रधानमंत्री को आगे लिखा है, ‘‘मैं जानता हूं कि आयोजन के कार्यक्रम में बदलाव के लिये बहुत देर हो चुकी है। परंतु भारतीय धर्मनिरपेक्षता के अभिभावक के रूप में मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस तरह के आयोजनों का कार्यक्रम बनाते समय इन सरोकारों को ध्यान में रखा जाये और सभी धर्मों के पवित्र दिनों का सम्मान किया जाये जिन्हें राष्ट्रीय अवकाश का दिन घोषित किया गया है। मैंने अपनी चिंता से प्रधान न्यायाधीश को भी अवगत कराया है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति जोसेफ को भेजे अपने जवाब में लिखा था कि न्यायाधीश को खुद से ही यह सवाल करना चाहिए क्योंकि वह न्यायाधीश से नहीं पूछ सकते हैं कि संस्था के हित या व्यक्तिगत हित में से किसे महत्व दिया जाना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App