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वकील प्रशांत भूषण की बढ़ी मुश्किलें, SC की अवमानना में शुरू हुई कार्यवाही

प्रशांत भूषण न्यायपालिका से जुड़े मसले लगातार उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी।

नई दिल्ली | July 21, 2020 10:06 PM
कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब 20 अगस्त को प्रशांत भूषण की सजा पर बहस होगी। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायलाय ने न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में अधिवक्ता एवं कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ मंगलवार को स्वत: अवमानना की कार्यवाही शुरू की। शीर्ष अदालत ने ट्विटर इंडिया के खिलाफ भी न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। भूषण की कथित अपमानजनक टिप्पणियां ट्विटर हैंडल से ही प्रसारित हुयी थीं।न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष यह मामला बुधवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध है।

प्रशांत भूषण न्यायपालिका से जुड़े मसले लगातार उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी। भूषण ने भीमा-कोरेगांव मामले में आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिये थे।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशांत भूषण के किस ट्वीट को पहली नजर में शीर्ष अदालत की अवमानना करने वाला माना गया है।इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय ने नवंबर, 2009 में प्रशांत भूषण द्वारा एक पत्रिका को दिये गये साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ पूर्व और पीठासीन न्यायाधीशों के बारे में कथित रूप से आक्षेप किये जाने के मामले में उन्हें अवमानना का नोटिस दिया था।

यह मामला शीर्ष अदालत में अभी तक लंबित है और न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह प्रकरण अंतिम बार मई, 2012 में सूचीबद्ध हुआ था।

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