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अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, न्यायालय ने सुब्रमण्यम स्वामी को दखल देने से रोका

इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पहला अहम फैसला देते हुए तीसरे पक्ष की सभी हस्तक्षेप याचिकाएं खारिज कर दीं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बुधवार से अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पहला अहम फैसला देते हुए तीसरे पक्ष की सभी हस्तक्षेप याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद और वकील सुब्रमण्यम स्वामी को भी हस्तक्षेप करने से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार को साफ शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में कोई आईए स्वीकार न करें। कोर्ट का फैसला स्वामी की उस दलील के बाद आया, जब उन्होंने कहा कि अयोध्या में विवादास्पाद भूमि पर पूजा करना हमारा मौलिक अधिकार है और ये मौलिक अधिकार संपत्ति के अधिकार से बड़ा है। इस दलील पर कोर्ट ने कहा कि स्वामी की याचिका पर अलग से सुनवाई होगी। इस मामले में अब किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप वाली याचिका को मान्य नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में लगभग 30 हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इसमें फिल्म निर्माता अपर्णा सेन और श्याम बेनेगल सहित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका भी शामिल थी।

बता दें कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बाद अब बौद्ध समुदाय ने भी अयोध्या की विवादित भूमि पर अपना दावा ठोक दिया है। बौद्ध समुदाय के कुछ सदस्यों ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि अयोध्या की विवादित भूमि असल में एक बौद्ध स्थल है। याचिका में कहा गया है कि बौद्ध समुदाय के दावे का आधार विवादित भूमि पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा की गई 4 खुदाई है, जिनमें बौद्ध धर्म से जुड़े अवशेष मिले हैं। गौरतलब है कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा विवादित स्थल पर अन्तिम बार खुदाई साल 2002-03 में की गई थी। याचिका के अनुसार, अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण से पहले विवादित भूमि का संबंध बौद्ध धर्म से था।

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