राजा भैया और मुलायम सिंह यादव की मुलाकात पर ओपी राजभर ने साधी चुप्पी, कहा- ये राजनीति है, यहां मुलाकातें होती रहती हैं

उत्तरप्रदेश कोटे के लिए हुए राज्यसभा चुनावों में सपा और बसपा गठबंधन प्रत्याशी का समर्थन नहीं किए जाने के कारण अखिलेश यादव राजा भैया से नाराज हो गए। दोनों के बीच के संबंध काफी कड़वे हो गए थे।

पिछले दिनों कुंडा से विधायक राजा भैया ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात की। (फोटो: ट्विटर/ raghuraj_bhadri)

पिछले दिनों उत्तरप्रदेश के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात की। राजा भैया ने मुलाक़ात की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी साझा की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाक़ात पर सपा की गठबंधन सहयोगी सुभासपा के नेता ओपी राजभर ने चुप्पी साध ली है और कहा कि ये राजनीति है, यहां मुलाकातें होती रहती हैं।

उत्तरप्रदेश के कौशांबी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने मुलायम सिंह यादव और राजा भैया के बीच हुई मुलाक़ात पर चुप्पी साध ली। हालांकि उन्होंने यह कहा कि ये राजनीति है और यहां हर कोई किसी न किसी से मिलता ही रहता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के लोग कहते हैं कि हिंदुत्व खतरे में है, लेकिन हिंदुत्व खतरे में नहीं, बल्कि भाजपा की कुर्सी खतरे में है।

आगामी उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने छोटी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वे ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा से गठबंधन कर चुके हैं। इसके अलावा जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के साथ भी गठबंधन करने की चर्चा है। बीते दिनों जब जनसत्ता दल के अध्यक्ष व कुंडा से विधायक राजा भैया ने मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात की तो उनके भी गठबंधन में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे।

हालांकि राजा भैया ने इन कयासों पर लगाम लगा दिया और अपने पत्ते नहीं खोले। कुंडा से विधायक राजा भैया ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात के बाद कहा कि वह उनके जन्मदिन के मौके पर हमेशा आते रहे हैं। उनसे आशीर्वाद लेते रहे हैं और वे शुभकामनाएं देते रहे हैं। इस बार बाहर होने के कारण उनके जन्मदिन पर नहीं आए। इसलिए इसके कोई और अर्थ न निकाले जाएं।

गौरतलब है कि साल 2019 में उत्तरप्रदेश कोटे के लिए हुए राज्यसभा चुनावों में सपा और बसपा गठबंधन प्रत्याशी का समर्थन नहीं किए जाने के कारण अखिलेश यादव राजा भैया से नाराज हो गए। दोनों के बीच के संबंध काफी कड़वे हो गए थे। इतना ही नहीं उन्होंने एक सभा में बिना नाम लिए हुए राजा भैया पर निशाना साधते हुए यह भी कह दिया था कि क्षत्रियों के लिए एक पुरानी कहावत है कि रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाए पर वचन ना जाई।  लेकिन उनका वचन ही चला गया, कैसे लोग हैं, जिनका वचन ही चला गया।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट