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SBI रिपोर्ट में दावा, तंबाकू, शराब छोड़ने को प्रेरित करती है प्रधानमंत्री जन-धन योजना

जिन गांववासियों ने अकाउंट खुलवाए हैं उन्होंने ज्यादा पैसे बचाना शुरू कर दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पैसे बचाने के अलावा लोगों ने शराब और तंबाकू का सेवन करना भी कम कर दिया है।

Author नई दिल्ली | October 16, 2017 3:46 PM
शराब छोड़ने को प्रेरित करती है प्रधानमंत्री जन-धन योजना (फोटो सोर्स – PTI)

प्रधानमंत्री जन धन योजना का असर लोगों के जीवन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस योजना के अंतर्गत जिन गांववालों ने बैंक में खाते खुलवाए थे उनके जीवन में बड़ा बदलाव होता दिख रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के इकॉनोमिक रिसर्च विंग ने एक अध्ययन किया, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत जिन गांववासियों ने अकाउंट खुलवाए हैं उन्होंने ज्यादा पैसे बचाना शुरू कर दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पैसे बचाने के अलावा लोगों ने शराब और तंबाकू का सेवन करना भी कम कर दिया है। इस तरह का बड़ा बदलाव शायद ही कभी बड़े पैमाने पर देखा गया है। जन धन योजना का प्रभाव देश में बड़ा बदलाव ला सकता है।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि हो सकता है कि इससे देश के ग्रामीण इलाकों मुद्रास्फीति भी धीमी हो सकती है। जब इस योजना को लॉन्च किया गया था तब यह सोचा जा रहा था कि कैश के ज्यादा सर्कुलेशन की वजह से मुद्दास्फीति में वृद्धि हो सकती है, अध्ययन में यह बात सामने आई है कि वह राज्य जिनके ग्रामीण इलाकों में 50 फीसदी से ज्यादा जन धन खाते हैं, उनमें मुद्रास्फीति में सकारात्मक बदलाव आया है।

बहुत से लोगों ने 8 नवंबर 2016 को आए नोटबंदी के फैसले के बाद जन धन योजना के तहत खाते खुलवाए थे। शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री जन धन योजना का क्या प्रभाव पड़ा, इस पर भी एसबीआई ने स्टडी की है। इस स्टडी से जुड़ा हुआ रिसर्च पेपर इस साल के अंत तक जारी होने की संभावना है। एसबीआई की स्टडी में कहा गया है, ‘विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि अर्थव्यवस्था की औपचारिकता के अलावा वित्तीय समावेशन के ठोस फायदे भी हैं, जो मुद्रास्फीति के डेटा में दिखाई दे रहे हैं।’ एसबीआई की ग्रुप चीफ इकॉनोमिक एडवाइजर सोम्या कांति घोष ने कहा है, ‘स्टडी में यह पाया गया है कि जिन राज्यों में ज्यादा प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अकाउंट्स खोले गए हैं, वहां शराब ऐर तंबाकू जैसे मादक पदार्थ के सेवन में काफी कमी आई है।’

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