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SBI, ICICI समेत इन बैंक में संदिग्ध लेनदेन में बढ़ोतरी, रिपोर्ट में दावा

कई मामलों में एफआईयू ने जांच शुरू कर दी है। उदाहरण के लिए एक सरकारी बैंक को दिल्ली की एक कंपनी के कैपिटल मार्केट ट्रांजेक्शंस के बारे में जानकारी मुहैया कराने को कहा गया है।

Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: September 11, 2020 8:22 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

देश में कोविड-19 महामारी का प्रकोप शुरू होने के बाद से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में बहुत तेजी आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक और एचडीएफसी (HDFC) बैंक जैसे शीर्ष बैंकों ने इन बारे में एजेंसियों को आगाह किया है। उनका कहना है कि कोरोना काल में बैंक, कैश और ओवरसीज ट्रांसफर के संदिग्ध मामलों में काफी तेजी आई है।

सूत्रों के मुताबिक, खासकर ऐसी कंपनियों पर नजर है जिनकी ट्रेडिंग में अचानक तेजी आई है अथवा जिन्होंने अनरिलेटेड गुड्स और सर्विसेज में डीलिंग बढ़ाई है या जिन कंपनियों ने विदेश पैसा भेजा है। एक सूत्र ने कहा, ‘बैंकों के मुताबिक अप्रैल से इस तरह के मामलों में 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है और कुछ मामलों में तो यह बढ़ोतरी 50 फीसदी तक है।’ इकोनॉमिक्स टाइम्स ने एक सीनियर बैंक अधिकारी के हवाले से बताया कि संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखने वाली केंद्रीय एजेंसी फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) इस तरह के कई मामलों की जांच कर रही है। उसने साथ ही कई सरकारी बैंकों को फटकार भी लगाई है जिन्होंने इस बारे में लापरवाही की।

नियमों के मुताबिक, बैंकों, एनबीएफसी और इंश्योरेंस कंपनियों को संदिग्ध लेनदेन के बारे में हर महीने एफआईयू को रिपोर्ट देनी पड़ती है। इस बारे में कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जानकारों की मानें तो हर साल एफआईयू को औसतन करीब 10 लाख संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दी जाती है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर (फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज) केवी कार्तिक ने कहा, ‘कोरोना संकट के कारण कुछ लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। वजह यह है कि कोरोना काल में लेनदेन के परंपरागत तरीके बदल गए हैं।’

जानकारों का कहना है कि कई मामलों में एफआईयू ने जांच शुरू कर दी है। उदाहरण के लिए एक सरकारी बैंक को दिल्ली की एक कंपनी के कैपिटल मार्केट ट्रांजेक्शंस के बारे में जानकारी मुहैया कराने को कहा गया है। इस कंपनी के संदिग्ध लेनदेन के बारे में एक अन्य बैंक ने जानकारी दी थी। इस बारे में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एफआईयू को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।

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