केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर प्रस्तावित एक प्रमुख जल विद्युत परियोजना के मामले में बड़ा कदम उठाया है। कदम यह है कि सरकारी बिजली कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) ने रामबन जिले में सावलकोट जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 5,129 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
चिनाब नदी पर सावलकोट परियोजना का काम किया जाना है और इसके जरिये 1,856 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य है। यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है।
डैम, सुरंगों और अन्य संबंधित कामों के लिए निविदा जमा करने की प्रक्रिया 12 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगी। शर्तों के मुताबिक, निविदा 180 दिनों तक वैध रहेगी। इस परियोजना को 3,285 दिन में पूरा किया जाना है।
‘सिंधु नदी का पानी भारत की जरूरतों को पूरा करेगा, पाकिस्तान की नहीं’
सावलकोट जलविद्युत परियोजना पर कई सालों से विचार चल रहा है लेकिन बदलते राजनीतिक हालात और चिनाब नदी के पानी में भारत की हिस्सेदारी के इस्तेमाल पर बढ़ते जोर के बीच इसे तेज किया जा रहा है।
बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी
इस परियोजना के पूरा होने पर जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी और राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से रामबन जिले में रोजगार के मौके पैदा होंगे और बुनियादी ढांचे का भी विकास होगा क्योंकि परियोजना के कई अहम हिस्सों का काम यहीं किया जाएगा।
सरकार ने स्थगित कर दी थी सिंधु जल संधि
पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकता।
भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इससे पहले दोनों देशों के बीच नौ साल तक बातचीत चली थी। 1960 की संधि के तहत, भारत का पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज पर नियंत्रण है जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब का ज्यादातर पानी मिलता है हालांकि भारत को पश्चिमी नदियों के पानी के सीमित उपयोग का अधिकार भी हासिल है।
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