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CAB: कांग्रेस नहीं सावरकर और जिन्ना करते थे टू नेशन थ्योरी पर विश्वास, अमित शाह के बयान पर कपिल सिब्बल का पलटवार

Citizenship Amendment Bill, Savarkar- Jinnah: कपिल सिब्बल ने कहा कि अमित शाह को यह बयान वापस लेना चाहिए कि देश का विभाजन धार्मिक आधार पर कांग्रेस ने करवाया था इसलिए उनकी सरकार को अब यह विधेयक लाने की आवश्यकता पड़ी।

Author दिल्ली | Updated: December 11, 2019 6:13 PM
कपिल सिब्बल ने अमित शाह पर कसा तंज।(पीटीआई फोटो/एक्सप्रेस फोटो)

Citizenship Amendment Bill, Savarkar- Jinnah: नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने राज्यसभा में कहा कि वीर सावरकर और जिन्ना, दोनों द्विराष्ट्र सिद्धान्त में विश्वास करते थे जबकि कांग्रेस एक राष्ट्र में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि इसलिए गृह मंत्री अमित शाह को लोकसभा में दिया गया उनका यह बयान वापस लेना चाहिए कि देश का विभाजन धार्मिक आधार पर कांग्रेस ने करवाया था इसलिए उनकी सरकार को अब यह विधेयक लाने की आवश्यकता पड़ी। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमित शाह द्वारा लाया गया CAB बिल द्विराष्ट्र सिद्धान्त को कानूनी रंग दे रहा है।

क्या बोले सिब्बल: उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने यह सही कहा है कि यह एक ऐतिहासिक विधेयक है क्योंकि ‘‘आप संविधान की बुनियाद को बदलने जा रहे हैं, इसलिए यह ऐतिहासिक विधेयक है। आप हमारे इतिहास को बदलने जा रहे हैं।’’ सिब्बल ने आगे कहा कि यह विधेयक द्विराष्ट्र सिद्धान्त को कानूनी रंग दे रहा है।

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विपक्ष का हमला: बसपा के सतीश मिश्रा ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने जानना चाहा कि नागरिकता के लिए 31 दिसंबर 2014 की ‘कट-आफ’ तिथि किस आधार पर तय की गयी है, सरकार को स्पष्ट करना चाहिये। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिये संविधान की आत्मा ‘धर्म-निरपेक्षता’ को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने इस संदर्भ में सरकार से पुर्निवचार करने और विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की।

मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा: इस बिल के खिलाफ बोलते हुए पीडीएफ के सांसद मुहम्मद फैज ने कहा कि जब से सरकार सत्ता में आई है तब से तीन तलाक, धारा 370, नागरिकता विधेयक जैसे कदमों के जरिये मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधेयक में उन मुस्लिमों को दरकिनार किया जा रहा है जिन्होंने मुल्क के बंटवारे के वक्त स्वेच्छा से धर्मनिरपेक्ष देश भारत में रहने का फैसला किया था।

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