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Satta Matka: सट्टा मटका क्‍या है, भारत में कैसे हुई इसकी शुरुआत और कौन है ‘मटका किंग’, जानिए

Satta King, Satta Matka 2018: सट्टा यानी मटका जुआ, लॉटरी का यह रूप भारत में प्रतिबंधित है। इसी शुरुआत न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज से बॉम्‍बे कॉटन एक्सचेंज से भेजी जाने वाली रुई के शुरुआती और अंतिम दामों पर सट्टा लगाने से हुई। 1961 में न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया।

Author November 25, 2018 8:51 AM
Satta Matka King 2018: सट्टेबाजी में इस्‍तेमाल होने वाली 0 से 9 के बीच की किसी भी संख्‍या को ‘सिंगल’ कहते हैं। (Representational Image)

सट्टा मटका, Satta King, Satta Matka 2018: सट्टा यानी मटका जुआ, लॉटरी का यह रूप भारत में प्रतिबंधित है। भारत में कई तरह का Matka खेला जाता है। जैसे- राजधानी डे, मेन मुंबई डे, वर्ली डे, मिलन डे, सुप्रीम डे, सुपर कल्‍याण, मिलन नाइट, सुप्रीम नाइट, राजधानी नाइट, कल्‍याण नाइट, सागर नाइट, कमल डे, बॉम्‍बे बाजार, भाग्‍यलक्ष्‍मी, सागर डे, कुबेर मॉर्निंग आदि। आज के समय में नंबरों पर सट्टा खेला जाता है। इस धंधे में शामिल लोग खेल जीतने के लिए अपनी पसंद के नंबर पर पैसा लगाते हें।

जो रुपयों का यह खेल जीतता है, उसे Satta King या Matka King कहते हैं और ढेर सारी रकम भी उसे हासिल होती है। भारत में कल्‍याणजी भगत, सुरेश भगत, रतन खत्री को ‘Matka King’ माना जाता रहा है। बंटवारे के बाद कराची से मुंबई आए सिंधी, खत्री ने मुंबई और आस-पास के इलाकों में मटका को प्रचलन में ला दिया।

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इसी शुरुआत न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज से बॉम्‍बे कॉटन एक्सचेंज से भेजी जाने वाली रुई के शुरुआती और अंतिम दामों पर सट्टा लगाने से हुई। 1961 में न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद रतन खत्री ने एक नया तरीका निकाला। काल्‍पनिक उत्‍पादों के शुरुआती और अंतिम दामों की सट्टेबाजी का। इसमें कागज के टुकड़ों पर नंबर लिखे जाते और फिर उन्‍हें एक मटके में रख दिया जाता। एक व्‍यक्ति चिट निकालता और विजेता नंबर की घोषणा करता। खत्री का मटका सोमवार से शुक्रवार चलता जबकि कल्‍याणीजी भगत का मटका हफ्ते में सातों दिन होता था।

मटका की अपनी शब्‍दावली भी है। जैसे सट्टेबाजी में इस्‍तेमाल होने वाली 0 से 9 के बीच की किसी भी संख्‍या को ‘सिंगल’ कहते हैं। 00 से 00 के बीच की किसी भी दो संख्‍याओं को ‘जोड़ी’ कहा जाता है। यह एक ऐसा जुआ है जो दुनियाभर में बड़े पैमाने पर खेला जाता है। हालांकि कई देशों समेत भारत में भी इसे गैरकानूनी दर्जा दिया गया है।

ब्रिटिश राज में बनाए गए पब्लिक गैंबलिंग एक्‍ट 1867 के तहत देश में सट्टा खेलना गैर-कानूनी है। पहली बार जुआ खेलते हुए पकड़े जाने पर 100 से 300 रुपये तक का जुर्माना लगता है या फिर एक महीने तक की जेल की सजा होती है। अगर दोबारा या इसके बाद पकड़े गए तो 200 से 500 रुपये जुर्माना देना पड़ सकता है या एक से 6 महीने की जेल या दोनों हो सकते हैं।

नोट: सट्टा मटका भारत में प्रतिबंधित हैं। इन खबरों का उद्देश्‍य आपको जागरूक करना है, सट्टा मटका के लिए प्रेरित करना नहीं।

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