पंजाब की राजनीति में रनवीत सिंह बिट्टू का नाम अक्सर सुर्खियों में रहा है। चाहें वह कांग्रेस के लोकसभा सांसद में रूप में रहे हों या फिर अब भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री के रूप में, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में एक अलग ही पहचान बनाई है।

दिलजीत दोसांझ की फिल्म “सतलुज” को लेकर बिट्टू के बयान ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने केंद्रीय मंत्री बिट्टू के बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। वहीं, बीजेपी को भी इस मुद्दे पर संभलकर कदम उठाना पड़ रहा है।

विवाद उस वक्त बढ़ गया जब फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने पर सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का फैसला किया। जिसके बाद पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्र के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला पारदर्शिता और पंजाब सांस्कृति आवाजों की जीत है।

उन्होंने साफ कहा कि देश में कानून सबसे ऊपर है, लेकिन पंजाब के फिल्म जगत से जुड़े लोगों की चिंताओं को भी निष्पक्ष तरीके से सुना जाना चाहिए।

हालांकि, बिट्टू ने ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म को ZEE5 से हटाने में न तो भाजपा और न ही केंद्र सरकार की कोई भूमिका थी। साथ ही यह तर्क दिया कि सतलुज फिल्म पंजाब के उग्रवाद के दौर का मुख्य रूप से एकतरफा चित्रण प्रस्तुत करती है। अपने दादा और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की विरासत का हवाला देते हुए उन्होंने 1990 के दशक के उग्रवाद-विरोधी अभियान का बचाव किया और कहा कि पंजाब पूरी सच्चाई का हकदार है, आधी कहानी का नहीं।

बिट्टू ने दोसांझ पर विदेश में रहते हुए पंजाबियों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया और अभिनेता और निर्देशक हनी त्रेहान को चुनौती दी कि वे उग्रवाद के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों, लोक सेवकों और नागरिकों पर एक फिल्म बनाएं।

उनके बयानों ने पंजाब में भाजपा की प्रतिद्वंद्वी पार्टियों को भाजपा को घेरने का मौका दे दिया। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोरा ने बिट्टू से दोसांझ को निशाना बनाने पर सवाल उठाया, जबकि उनका दावा था कि फिल्म को हटाने में न तो केंद्र सरकार की और न ही भाजपा की कोई भूमिका थी। अरोरा ने दोहराया कि पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी सरकार को फिल्म की निजी स्क्रीनिंग पर कोई आपत्ति नहीं है और उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म से संबंधित निर्णय केंद्र सरकार के पास हैं।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाड़िंग ने दोसांझ का बचाव करते हुए बिट्टू को याद दिलाया कि अभिनेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल चुके हैं। उन्होंने बिट्टू से आग्रह किया कि पंजाब की संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले जाने वाले कलाकार पर हमला करते समय सावधानी बरतें।

भाजपा के भीतर, हालांकि पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष ढिल्लों के रुख पर कायम रही, लेकिन कई पार्टी नेताओं ने निजी तौर पर इस बात पर जोर दिया कि बिट्टू का इस मुद्दे से भावनात्मक लगाव समझ में आता है, क्योंकि उनके दादा बेअंत सिंह की 1995 में एक आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी। फिर भी, उनका मानना ​​था कि बहस को व्यक्तिगत नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही इससे पार्टी के व्यापक राजनीतिक संदेश पर असर पड़ना चाहिए। एक वरिष्ट भाजपा नेता ने पूछा कियह फिल्म उस दौर की है जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, तो फिर भाजपा पर ध्यान क्यों केंद्रित किया जाना चाहिए?

जहां बिट्टू दोसांझ और सतलुज की आलोचना करने वाले एक मुखर नेता के रूप में उभरे हैं। वहीं बेअंत सिंह परिवार के अन्य सदस्य चुप्पी साधे हुए हैं। बेअंत सिंह के बेटे और पंजाब के पूर्व मंत्री तेज प्रकाश सिंह कोटली, उनके पोते और पूर्व राज्य मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली, और उनकी बेटी और पूर्व विधायक गुरकनवाल कौर सभी कांग्रेस नेता ने फिल्म या उससे जुड़े विवाद पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

यह घटना बिट्टू के करियर के एक जाने-पहचाने पैटर्न को दर्शाती है। 2020 में निरस्त हो चुके केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के दौरान, तत्कालीन कांग्रेस नेता बिट्टू ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए, यह आरोप लगाकर विवाद खड़ा कर दिया था कि “खालिस्तानी तत्व” किसान आंदोलन में घुसपैठ कर चुके हैं। मार्च 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद भी उनका आक्रामक रवैया अपरिवर्तित रहा। उसी वर्ष बाद में गिद्दरबाहा उपचुनाव के प्रचार के दौरान, उन्होंने कुछ किसान नेताओं की संपत्तियों की जांच की मांग करके और उनकी तुलना तालिबान से करके एक और विवाद को जन्म दिया।

इन विवादों के बावजूद, भाजपा में बिट्टू का महत्व बढ़ता ही जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे लुधियाना सीट से राज्य कांग्रेस अध्यक्ष राजा वाड़िंग से हार गए, लेकिन जल्द ही उन्हें राजस्थान से राज्यसभा में जगह मिल गई और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया।

हालांकि राज्यसभा में उनका कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हो गया और भाजपा ने उन्हें तुरंत पुनः मनोनीत नहीं किया, संविधान उन्हें दोनों सदनों के सदस्य न होते हुए भी छह महीने तक केंद्रीय मंत्री के रूप में बने रहने की अनुमति देता है। हालांकि, बिट्टू ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि राष्ट्रीय राजनीति में लगभग दो दशकों के बाद, अब वे पंजाब की राजनीति में वापसी करने और राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।

पंजाब भाजपा के भीतर कई नेता यह मानते हैं कि बिट्टू का मंत्री पद और बेअंत सिंह के पोते के रूप में उनकी पहचान उन्हें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। हालांकि, अन्य लोग चेतावनी देते हैं कि 2027 के चुनावों से पहले पार्टी के सामूहिक संदेश के अनुरूप ही उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

‘वे काले दिन कभी वापस नहीं आने चाहिए’, पंजाब के गांवों में दिखाई जा रही सतलुज फिल्म, उमड़ रही भीड़

पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फिल्म सतलुज इन दिनों पंजाब के कई गांवों में दिखाई जा रही है। ऐसा ही एक गांव लुधियाना के जंगपुर में है, जहां एक गुरुद्वारे के बगल में खाली प्लॉट में गुरुवार की रात को फिल्म की स्क्रीनिंग की गई। पढ़ें पूरी खबर।