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जेल में बंद सर्वणा भवन के मालिक को पड़ा दिल का दौरा, निजी अस्पताल में इलाज के लिए बेटा पहुंचा कोर्ट

राजागोपाल के वकील ने न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एम निर्मल कुमार की पीठ के सामने जब याचिका का उल्लेख किया तो अतिरिक्त लोक अभियोजक बोले कि वह मंगलवार (16 जुलाई, 2019) को तमिलनाडु सरकार से निर्देश प्राप्त करेंगे।

Author नई दिल्ली | July 15, 2019 10:37 PM
राजगोपाल ने एक अन्य आरोपी के साथ हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काटने के लिए नौ जुलाई को एक सत्र अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था। (फोटोः पीटीआई)

जानी-मानी रेस्त्रां चेन सर्वणा भवन के मालिक पी.राजगोपाल को जेल में दिल का दौरा पड़ गया, जिसके बाद उनके परिवार ने निजी अस्पताल में इलाज के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हत्या के एक मामले में आत्मसमर्पण करने वाले राजगोपाल ने मद्रास हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि उनकी बिगड़ती सेहत के चलते उन्हें सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। फिलहाल वह एक सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं।

राजागोपाल के वकील ने न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एम निर्मल कुमार की पीठ के सामने जब याचिका का उल्लेख किया तो अतिरिक्त लोक अभियोजक बोले कि वह मंगलवार (16 जुलाई, 2019) को तमिलनाडु सरकार से निर्देश प्राप्त करेंगे।

राजगोपाल के बेटे द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया है कि आत्मसमर्पण के बाद स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया है। दक्षिण भारतीय रेस्त्रां चेन के संस्थापक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्हें ट्रायल कोर्ट परिसर में एंबुलेंस के जरिए लाया गया था, जिसके बाद उन्हें वहां से जेल भेजा गया था। हालांकि, डॉक्टर्स की सलाह पर उन्हें चेक-अप के बाद स्टेनली अस्पताल के ‘कॉन्विक्ट वॉर्ड’ में भर्ती किया गया।

पी राजगोपाल के बेटे का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने उनके पिता की दवाइयां बदल दीं, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ गई, जबकि 13 जुलाई को उन्हें कार्डियक अरेस्ट पड़ा। याचिकाकर्ता का दावा है कि अपर्याप्त सुविधाओं और संसाधन की कमी से स्टेनली अस्पताल में उनके पिता के कुछ मेडिकल टेस्ट नहीं हो सके।

बता दें कि राजगोपाल ने एक अन्य आरोपी के साथ हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काटने के लिए नौ जुलाई को एक सत्र अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने और समय मांगने वाली अपनी याचिका उच्चतम न्यायालय में खारिज होने के बाद आत्मसमर्पण किया था। (पीटीआई-भाषा इन्पुट्स के साथ)

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