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संत सम्मेलन: मोदी को बताया ‘भगवान राम का अवतार’, कहा- मंदिरविरोधी लोगों से भरी है न्यायपालिका

सम्मलेन में सबसे लंबा बोलने वाले वेदांती ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को 70 साल तक लंबित रखा लेकिन 'अब कोई ऐसा नहीं कर पाएगा।' उन्होंने कहा, 'मंदिर बनाने का कानून बनेगा, विधेयक आएगा, बिल पास होगा

संतों ने सम्मेलन में न्यायपालिका के प्रति जतायी नाराजगी। (express photo)

अखिल भारतीय संत समिति के सम्मेलन में मांग की गई है कि सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए रास्ता साफ करना चाहिए। दो दिवसीय यह सम्मेलन शनिवार को शुरू हुआ। खास बात यह है कि इस सम्मेलन में एक वक्ता ने पीएम नरेंद्र मोदी को ‘भगवान राम का अवतार’ बताया। वहीं, एक अन्य ने कहा कि न्यायपालिका से मदद नहीं मिलगी क्योंकि यह ‘तमंदिर विरोधी लोगों’ से भरा हुआ है। बता दें कि मंदिर निर्माण को लेकर संतों की यह मांग ऐसे वक्त में सामने आई है, जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी कानून के जरिए राम मंदिर बनवाने की बात कही थी।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद ने कहा, ‘विपक्षी समूहों से बातचीत करने की कोई भी संभावना खत्म हो चुकी है।’ जहां सम्मेलन में पहुंचे अधिकतर लोगों ने राम मंदिर पर कानून लाने की मांग की, वहीं राम जन्मभूमि न्यास सदस्य राम विलास वेदांती ने कहा कि मंदिर किसी विधेयक या कानून के जरिए नहीं बल्कि ‘आपसी रजामंदी’ से बन सकता है वर्ना ‘कोई भी सांप्रदायिक दंगे रोक नहीं पाएगा।’ वेदांती ने अपने भाषण में कहा, ‘मैं अयोध्या में विराजमान रामलला से प्रार्थना करता हूं कि वे पीएम और बाकी सभी को सदबुद्धि दे ताकि रामलला का भव्य मंदिर दिसंबर से बनना शुरू हो सके।’

ram mandir राम मंदिर के मुद्दे पर हुए संत सम्मेलन का एक दृश्य। (express photo)

वेदांती ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन के मालिकाना हक मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2019 तक टालने का भी जिक्र किया। सम्मलेन में सबसे लंबा बोलने वाले वेदांती ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को 70 साल तक लंबित रखा लेकिन ‘अब कोई ऐसा नहीं कर पाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘मंदिर बनाने का कानून बनेगा, विधेयक आएगा, बिल पास होगा, लेकिन फिर देश में सांप्रदायिक दंगा को कोई रोक नहीं सकता। हम चाहते हैं खून खराबा न हो। इस देश के अंदर शांति बनी रहे।’ वेदांती ने यह भी आश्वासन दिया कि अगर अयोध्या में राम मंदिर बना तो तो लखनऊ में ‘खुदा के नाम पर’ एक मस्जिद बनेगा।

वहीं, हरियाणा के जैन मुनि गुप्तिसागर ने कहा कि न्यायपालिका मंदिर नहीं बनने देगी क्योंकि यह बीते 70 साल से वहां मंदिर विरोधी लोग बैठे हुए हैं। वहीं, स्वामी विवेकानंदजी महाराज ने कहा कि इससे ज्यादा आदर्श स्थिति नहीं हो सकती कि राम भक्त नरेंद्र मोदी पीएम हैं, जबकि राम भक्त योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे महसूस होता है कि भक्ति में मोदी जी भगवान राम के अवतार हैं। अगर राम मंदिर उनके कार्यकाल में नहीं बनता तो यह हैरान करने वाला होगा।’ वहीं, वृदांवन जितेंद्रनंद सरस्वती ने कहा कि अगर मुस्लिम शरीयत कोर्ट जारी रखेंगे तो संत समिति भी ‘केसरिया कोर्ट’ लाएगा। उनके मुताबिक, ‘संविधान का पालन करना सिर्फ हिंदुओं की जिम्मेदारी नहीं।’

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