शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के ‘वंदे मातरम’ सुनाकर दिखाएं। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने वाला विधेयक राज्यसभा में पेश करने जा रही है।
संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा, ”मैं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को चुनौती देता हूं कि वे बिना टेलीप्रॉम्प्टर के ‘वंदे मातरम’ सुनाकर दिखाएं।”
गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश करने वाले हैं। इस विधेयक में ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की तरह दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव है। यह विधेयक संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पेश किया जाएगा।
आंदोलन को लेकर सरकार पर साधा निशाना
राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन की ताकत को कम करके आंका है।
उन्होंने कहा, ”सरकार को ना तो यह समझ आया कि क्या होने वाला है ना यह कि क्या हो रहा है और आगे क्या होगा। उन्हें लगा कि हमें कीड़ों की तरह खत्म कर देंगे। लेकिन यह कॉकरोच जनता पार्टी हजारों-लाखों की संख्या में जंतर-मंतर पहुंच गई है। देश के बड़े-बड़े शहरों में इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।”
महाराष्ट्र में बड़े विरोध प्रदर्शन का दावा
राउत ने कहा कि रविवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे समेत हजारों लोग, बच्चे और युवा शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि पुणे, नागपुर और पूरे महाराष्ट्र में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए हैं और देशभर में आंदोलन जारी है।
सरकार से पूछे सवाल
सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राउत ने कहा, ”आप क्या करेंगे? लाखों लोगों को जेल में डाल देंगे या सबके पीछे सीबीआई लगा देंगे? अगर सरकार के बस में होता तो जंतर-मंतर पर बैठे हर व्यक्ति के खिलाफ ईडी की कार्रवाई कर देती लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है।”
उन्होंने कहा कि अगर संसद मार्ग तक मार्च की अनुमति नहीं दी जाती है तो प्रदर्शनकारियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) मुख्यालय और सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करना चाहिए।
राउत ने कहा, ”अगर संसद मार्ग पर मार्च की अनुमति नहीं मिलती है तो मार्च ईडी मुख्यालय और सुप्रीम कोर्ट की ओर जाना चाहिए। इन दोनों संस्थानों ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है।”
सोनम वांगचुक मामले पर भी बोले
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े दिल्ली हाईकोर्ट के मामले पर राउत ने कहा कि न्यायिक मामलों पर अदालत को फैसला करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ”जंतर-मंतर पर बैठे हर बच्चे में नेतृत्व की क्षमता है। उन्हें किसी नेता की जरूरत नहीं है।”
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में ट्रांसफर करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उनकी पत्नी ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह फैसला वांगचुक के शारीरिक स्वायत्तता, सूचित सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन करता है।
CJP से जुड़े कार्यकर्ता शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है या सांसद मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन देते हैं तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
