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इंदिरा के बारे में जब संजय गांधी ने कहा था-लगता था मेरी मां तीन-चार दशकों तक चुनाव नहीं करवाएंगी

दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर को संजय गांधी ने बताया था कि आपातकाल के दौरान स्थिति को देखते हुए उन्हें लगता था कि उनकी मां (इंदिरा गांधी) चीन-चार दशकों तक चुनाव नहीं कराएंगी।

दिवंगत कांग्रेस नेता संजय गांधी. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

70 के दशक में जय प्रकाश नारायण द्वारा संपूर्ण क्रांति के आह्वान के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। देश भर में विपक्षी दलों के नेताओं की गिरफ्तारियां होने लगीं। जनता के लोकतांत्रिक अधिकार खत्म कर दिए गए। कहा जाता है कि उस दौरान प्रधानमंत्री के बाद देश में कोई दूसरा शख्स हैसियत रखता था, तो वह थे संजय गांधी। संजय गांधी तत्कालीन पीएम इंदिरा के बेटे थे। आपातकाल की घटना से जुड़ी एक बात का जिक्र कोमी कपूर ने ‘द संडे एक्सप्रेस’ में छपे कॉलम इनसाइड ट्रैक में किया। कोमी कपूर के मुताबिक कुलदीप नैयर को संजय गांधी ने बताया था कि आपातकाल के दौरान स्थिति को देखते हुए उन्हें लगता था कि उनकी मां (इंदिरा गांधी) चीन-चार दशकों तक चुनाव नहीं कराएंगी।

दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर की किताब ‘वन लिडर एंड वन आइकॉन’ इसी सप्ताह पब्लिश होने वाली है। इस किताब में महात्मा गांधी और जिन्ना से लेकर इंदिरा, वाजपेयी और मोदी तक के राजनीतिक शख्सियतों की अनकही जानकारियां शामिल हैं। कोमी कपूर ने अपने लेख में लिखा है कि नैयर की किताब में देश की राजनीति से जुड़ीं कई रोचक जानकारियां शामिल हैं। उनमें से एक संजय गांधी की उस बात का जिक्र है जिसमें उन्होंने आपातकाल के बाद नैयर से अपने मन की बात कही थी।

गौरतलब है कि 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। आपातकाल के फैसले को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन बताया जाता है। 21 मार्च 1977 को करीब 21 महीने की अवधि के बाद आपातकाल हटाकर चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। कहा जाता है कि उस दौरान अधिकांश फैसलों में संजय गांधी का दखल रहता था और वह खुद चुनाव कराने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन, इंदिरा गांधी ने चुनाव की घोषणा कीं और आपातकाल से आक्रोशित जनता का गुस्सा कांग्रेस को झेलना पड़ा।

इंदिरा गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली से चुनाव हार गईं। इसके बाद जनता पार्टी की सरकार बनी और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। उस दौरान 350 लोकसभा सीट वाली कांग्रेस पार्टी 153 सीटों तक सिमट कर रह गई। गौरतलब है कि आजादी के 30 साल बाद पहली बार देश में कांग्रेस के अलावा किसी दूसरे दल ने सरकार का गठन किया था।

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