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कोरोना से निपटने में ड्रोन बन रहा नया सिपाही, इलाकों को सैनेटाइज करने, अहम घोषणा करने, सर्वे करने में हो रहा इस्तेमाल, जानें-चेन्नई से रायपुर तक की कहानी

तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में एक रिलीज में कहा था कि ड्रोन्स इंसानों के मुकाबले ज्यादा इलाके, ज्यादा समय और बीमारी के कम खतरों के साथ काम कर सकते हैं।

रायपुर नगरपालिका ने चेन्नई की एक कंपनी को कोरोनावायरस से लड़ाई के लिए ड्रोन्स का ऑर्डर दिया है। (फोटो- पीटीआई)

जहां एक तरफ कोरोनावायरस के संकट को रोकने के लिए देशभर में केंद्र और राज्य सरकारों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के दम पर जंग छेड़ रखी है। वहीं, लॉकडाउन के बीच अब कुछ शहरी प्रशासन कोरोना को रोकने के लिए रोजमर्रा के अहम कामों में अनोखे तरीके अपना रहे हैं। कई राज्यों में प्रशासन अब ड्रोन्स की मदद से कोरोनावायरस का सामना कर रहे हैं। वे इन ड्रोन्स की ही मदद से इलाकों को सैनिटाइज कर रहे हैं। साथ ही इसके जरिए नागरिकों के लिए अहम घोषणाएं और जरूरी सर्वे भी किए जा रहे हैं।

लॉकडाउन के बीच ड्रोन्स की उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोजमर्रा के कामों में ड्रोन्स की सफलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्थित रायपुर नगरपालिका ने चेन्नई की गरुड़ा एयरोस्पेस कंपनी को 8 ड्रोन और 8 ड्रोन पायलट भेजने का आदेश दे दिया है। सड़क परिवहन और रेलवे सेवा बंद होने की वजह से इन ड्रोन्स को निजी सेवा के जरिए ही बुलाया जा रहा है। रायपुर नगरपालिका के कमिश्नर सौरभ कुमार का कहना है कि इजराइल से लेकर सिंगापुर तक ड्रोन्स को ही अहम कामों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन्स उन जगहों पर भी पहुंच जाते हैं, जहां लोग आसानी से नहीं पहुंच सकते हैं। जैसे- झुग्गी-बस्तियों में।

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कुमार के मुताबिक, प्रशासन इन ड्रोन्स का इस्तेमाल सार्वजनिक घोषणाओं के लिए भी करेगा। इलाकों को सैनिटाइज करने के लिए पानी, हाइड्रोजन परऑक्साइज और सिल्वर नाइट्रेट का इस्तेमाल हो रहा है, जो कि कोरोना को खत्म करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मंजूर कॉम्बिनेशन है। उन्होंने बताया कि पुलिस पिछले काफी समय से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही थी। अब इनका नए तरीके से इस्तेमाल होगा।

दूसरी तरफ ड्रोन बनाने वाली कंपनी गरुड़ा के संस्थापक अग्निश्वर जयप्रकाश का कहना है कि जमीन पर काम करने वालों पर कोरोनावायरस से संक्रमित होने का खतरा है, जबकि ड्रोन्स को ऐसा कोई खतरा नहीं है। अभी देश में करीब 4 लाख लोग कोरोना के खिलाफ जमीन से लड़ाई में जुटे हैं। तो इसके लिए ड्रोन्स का इस्तेमाल क्यों नहीं।

रायपुर नगरपालिका ने ड्रोन्स लेने का फैसला तमिलनाडु में इस प्रोजेक्ट की सफलता देखते हुए ही लिया है। तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने अपने सैनिटाइजेशन कार्यक्रम को कोरोनावायरस के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करार दिया था। वहां करीब 500 पायलट्स ने 300 ड्रोन्स के जरिए अस्पताल, मेट्रो और सड़कों को सैनिटाइज करने में अहम भूमिका निभाई थी। सैनिटाइजेशन में इंसानों और ड्रोन्स की तुलना करते हुए सरकार ने हाल ही में एक रिलीज भी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि इंसानों के मुकाबले ज्यादा इलाके की सफाई कर सकते हैं, ज्यादा देर तक काम कर सकते हैं और इन्हें खतरा भी काफी कम है।

दूसरी तरफ इंदौर नगरपालिका में भी कोरोनावायरस का सामना करने के लिए दो ड्रोन्स किराए पर लिए गए हैं। हर ड्रोन 5 एकड़ इलाके में आधे घंटे तक 60 लीटर डिसइंफेक्टेंट लेकर उड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन इन ड्रोन्स के जरिए उन इलाकों को साफ करने में जुटा है, जहां से कोरोनावायरस के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

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