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स्वतंत्रता सेनानी से लेकर जिलाधिकारी तक रहे हैं अलकायदा के इंडिया चीफ के पुरखे! हैरान हैं सनाउल हक के पास-पड़ोस वाले

साल 2009 में खुफिया एजेंसी के अधिकारी संभल स्थित हक के घर पहुंचे और बताया कि 11 सालों से लापता उनका बेटा असल में आतंकी संगठन तेहरीक-ए-तालिबान और अलकायदा के लिए काम कर रहा है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 10, 2019 8:47 AM
देवबंद की दारुल उलूम यूनिवर्सिटी से की थी ग्रेजुएशन की पढ़ाई (फोटो:Twitter)

उत्तर प्रदेश के संभल में दीपा सराय मोहल्ला चार साल बाद फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह है यहां का निवासी सनाउल हक, जिसे अमेरिका और अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त अभियान में पिछले महीने ढेर कर दिया। सनाउल हक अल कायदा की दक्षिण एशिया शाखा का चीफ था। साल 2015 में सनाउल हक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में भी टॉप पर था। सराय मोहल्ला में स्थानीय लोगों ने बताया कि आतंकी गतिविधियों के चलते मारा गए सनाउल हक का परिवार गांव में प्रसिद्ध लोगों में से एक था। उसके दादा गांव के प्रधान थ। उसके पूर्वज स्वतंत्रता सेनानी तक रहे। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक अलकायदा प्रमुख के परदादा बिट्रिश शासन के दौरान जिला न्यायधीश तक रहे। आतंकी संगठन में शामिल होने के चलते सनाउल हक के आस-पड़ोस वाले हैरान हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में सनाउल हक के भाई रिजवान ने बताया, ‘हमें उसकी मौत की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों ने बीते मंगलवार को दी। इससे हमें आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि साल 1998 में जब उसने घर छोड़ा तब वह महज 18 साल का था और उसके बाद से हमारी उससे कभी बात नहीं हुई।’ पेशे से शिक्षक रिजवान और उनके पिता इरफान-उल-हक व मां रुकईया कुछ सालों पहले तक गांव में रहते थे। 70 वर्षीय सनाउल हक की मां ने बताया, ‘साल 2009 में ही वो हमारे लिए मर गया था जब स्थानीय खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि वो आतंकी संगठन में शामिल हो चुका है।’ हक को साल 2010 में अलकायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी ने संगठन में एक पड़ा दिया था।

उल्लेखनीय है कि साल 2009 में खुफिया एजेंसी के अधिकारी संभल स्थित हक के घर पहुंचे और बताया कि 11 सालों से लापता उनका बेटा असल में आतंकी संगठन तेहरीक-ए-तालिबान और अलकायदा के लिए काम कर रहा है। बेटे की आतंकी संगठन में शामिल होने की जानकारी मिलते ही तब 75 वर्षीय हक के पिता इरफान-उल-हक ने तुरंत स्थानीय अखबार में विज्ञापन देकर बताया कि परिवार ने बेटे से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं।

सनाउल हक के आतंकी संगठन में शामिल होने के चलते खुफिया एजेंसियां बाद में उसके दोनों भाईयों को पूछताछ के लिए ले गई और इसी बीच साल 2017 में इरफान-उल-हक का निधन हो गया। रुकईया ने भी हमेशा के लिए दीपा सराय छोड़ दिया। पड़ोसियों के मुताबिक उन्होंने बताया कि वो अपने दूसरे बेटे के साथ रहेंगी, जो दिल्ली में इंजीनियर है।

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