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UP के संभल का रहने वाला Sanaul Haq कैसे बन गया अल-कायदा का इंडिया चीफ? जानिए

सनाउल हक ने 1991 में देवबंद मदरसा से स्नातक की डिग्री ली और दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद जिहादी गतिविधियों में शामिल हो गया। साल 1995 में सनाउल संभल से गायब हो गया और अपने परिवार से संपर्क तोड़ लिया।

Author नई दिल्ली | Published on: October 9, 2019 7:25 PM
देवबंद की दारुल उलूम यूनिवर्सिटी से की थी ग्रेजुएशन की पढ़ाई (फोटो:Twitter)

आतंकी संगठन अल कायदा के इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) चीफ असीम उमर को अमेरिकी और अफगानी सेना ने ज्वाइंट ऑपरेशन में 23 सितंबर को मूसा काला जिले में मार गिराया गया। अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि उमर पाकिस्तानी था और वह कुछ पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ मारा गया। हालांकि आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आतंकी संगठन अल कायदा के इंडियन सबकॉन्टिनेंट का मुखिया असीम उमर भारत का रहने वाला था। उसका असली नाम सनाउल हक था।

अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने पांच साल पहले जिस असीम उमर को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी उसका जन्म 1960-1970 के दशक की शुरुआत में हुआ था। वह संभल के मोहल्ला दीपा सराय गांव के निवासी इरफान-उल-हक और रूकैया के यहां जन्मा था। जब साल 2015 में इंडियन एक्सप्रेस सनाउल हक के माता पिता से मिलने पहुंचे थे तो उस समय उसके पिता इरफान की उम्र 80 साल और रुकैया कि उम्र 72 साल थी। इन दोनों ने पिछले दो दशक से अपने बेटे की शक्ल नहीं देखी थी और उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनका बेटा जिंदा है या मर गया।

इरफान के माता पिता के मुताबिक पहले उनके घर जांच पड़ताल के लिए पुलिस और जांच एंजेंसियों के लोग आते थे। सनाउल घर छोड़कर जा चुका था और बाद में पुलिस द्वारा उन्हें पता चला कि उनका बेटा एशिया के खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक संगठन का मुख्यिा बन चुका है। उसके मां-बाप का कहना है कि कई बार सुनने में आया कि सनाउल की मौत हो गई लेकिन फिर पुलिस ने एक बार बताया कि वह जिंदा है। सनाउल के मां-बाप कहते हैं कि हमारे लिए उसका मर ही जाना अच्छा है।

आतंक की राह पर कैसे निकल पड़ा सनाउल: सनाउल हक ने 1991 में देवबंद मदरसा से स्नातक की डिग्री ली और दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद जिहादी गतिविधियों में शामिल हो गया। साल 1995 में सनाउल संभल से गायब हो गया और अपने परिवार से संपर्क तोड़ लिया। बाद में वह पाकिस्तान चला गया और वहां जाकर उसने जामिया उलूम- ए-इस्लामिया के साथ जुड़ गया जिसे जिहादी संगठन के तौर पर जाना जाता है। इस संगठन से ही जैश-ए-मुहम्मद के नेता मौलाना मसूद अजहर, हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी का नेता कारी सैफुल्ला अख्तर और हरकत-उल-मुजाहिदीन के नेता फजल-उर-रहमान खलील जैसे आतंकी निकले।इसके बाद सनाउल हक ने हरकत-उल-मुजाहिदीन ज्वाइन किया। हरकत-उल-मुजाहिदीन को ISI की सबसे पुरानी एसेट माना जाता है। पाकिस्तानी खुफिया संगठन द्वारा 1980 में अफगानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ने के लिए इसे बनया गया था। अफगान युद्ध समाप्त होने के बाद, हरकत-उल-मुजाहिदीन ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए अपनी ताकत लगा दी।

साल 1990 से लेकर 2004 तक हक ने बटरसी, कराची और पेशावर में जिहादियों को प्रशिक्षण दिया और पीओके में आतंकी कैंपों में भी आतंकियों को ट्रेनिंग दी। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका पर अल-कायदा के हमले और उसके बाद अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले और आतंक पर युद्ध की शुरुआत के बाद, हक कराची वापस चला गया, और 2004 से 2006 तक हारुनाबाद में हरकत-उल-मुजाहिदीन के दफ्तर में पनाह ली।

सनाउल हक का अलकायदा जाना: हक के अलकायदा जाने की शुरुआत साल 2007 में शुरू हुई। पाकिस्तानी तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ ने इस्लामाबाद में लाल मस्जिद पर हमला करने का आदेश दिया, जो जामिया उलूम-ए-इस्लामिया के पूर्व छात्र मौलाना अब्दुल रशीद गाजी द्वारा संचालित थी। इसलके बाद हक ने मुहम्मद इलियास कश्मीरी से संपर्क साधा जोकि जाना माना जिहादी था और अलकायदा में जिसकी पहचान भी थी। माना जाता है कि हक को यहां से निज़ामुद्दीन शमज़ाई जोकि (तालिबान से जुड़ा एक मौलवी है) ने आगे का रास्ता बताया। । मौलाना शामजई ने एक बार दावा किया था कि अफगानिस्तान के मुल्ला मुहम्मद उमर के इस्लामिक अमीरात में एक बार उसके साथ “राज्य अतिथि” की तरह बर्ताव किया गया था।

2013 में, हक ने भारत में मुस्लिमों को विशेष रूप से निशाना बनाने के लिए पहली बार घोषणा की। यह अपने आप में अलग तरह का वैश्विक जिहादी लेखन था जो हक ने लिखा था। उसने भारतीय मुस्लमानों को भड़काने के लिए लिखा था कि मस्जिद के सामने लाल किला आपकी गुलामी पर और हिंदुओं के हाथों सामूहिक हत्या पर खून के आंसू रोता है।

साल 2014 में अयाम अल जवाहिरी  जो  ओसामा बिन लादेन के अमेरिकी सेना द्वारा मार गिराए जाने के बाद  अलकायदा का चीफ बना। उसने अल कायदा के इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS)  की घोषणा की और  मौलाना असीम उमर यानी सनाउल हक को  इसका मुखिया घोषित किया। अल कायदा के इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS)  ने एशिया के कई हिस्सों में हुई वारदातों में अपनी मौजूदगी जाहिर की है। बांग्लादेश में सेक्यूलर ब्लॉगर्स की हत्या के लिए भी यह संगठन जिम्मेदार रह चुका है।

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