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Delhi Assembly Polls 2020: समोसा और प्रचार, नामांकन पर चुटकी

Delhi Assembly Polls 2020: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नामांकन में हुई देरी को लेकर चितिंत समर्थकों पर अब आयोग के अधिकारी भी चुटकी ले रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: January 27, 2020 6:14 AM
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल।

Delhi Assembly Polls 2020: राजधानी में चल रहे चुनाव प्रचार में शामिल होने वाले लोगों में छुटभैए नेताओं से लेकर मुहल्ले के बच्चे व उनके दोस्त भी सक्रिय हैं। ऐसी ही एक बानगी बेदिल को भी देखने को मिली। एक पार्टी विशेष की टोपी पहने कुछ बच्चे पटपड़गंज के गलियों में घूम रहे थे। उनकी अगुआई एक छुटभैए नेता कर रहे थे। टोली में शामिल एक बच्चे ने फोन कर अपने दोस्त को बुलाया। कहा कि यार लाल बत्ती वाली दुकान के सामने आ जा हम मिलकर मजे करेंगें। पूरा मोहल्ला घूमना है चाय, समोसा भी करेंगे। बड़ा मजा आ रहा है आ जा।

हाई प्रोफाइल सीट नहीं

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के एक पदाधिकारी का नाम विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची में ही आ गया था। वह लोकसभा का चुनाव भी लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। यही कारण है कि जब पार्टी ने उन्हें एक सुरक्षित सीट से विधानसभा में उम्मीदवार बनाया तो उन्हें लगा कि यह सीट हाई प्रोफाइल सीट नहीं है। हालांकि, इस सीट से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित सरकार में मंत्री भी रहे थे। पर यह सीट पार्टी के वर्तमान पदाधिकारी को पंसद नहीं आई और उन्होंने कुछ मीडिया में अपना साक्षात्कार देकर नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। एक बारी तो ऐसा लगा कि घर वापसी कर चुके पूर्व मंत्री पर पार्टी दांव लगा सकती है, लेकिन जब दूसरी लिस्ट आई तो उसमें उस सीट को लेकर कोई बदलाव नहीं देखने को मिला। हालांकि, घर वापसी कर चुके दो अन्य नेताओं का नाम शामिल था, जिसे पार्टी ने उन्हीं दोनों सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां से वे कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे। अब देखना बड़ा ही दिलचस्त होगा कि अपनी मनपंसद सीट की मांग मीडिया के माध्यम से मांगने वाले पदाधिकारी अपनी जीत दर्ज करवा पाते हैं या फिर लोकसभा चुनाव की तरह हार का सामना करना पड़ सकता है।

अफसर चुस्त

कई बार विभाग के कर्मचारियों की सुस्ती उसके चुस्त अफसर की किरकिरी करा देती है। ऐसा ही एक वाकया हुआ बीते दिनों दिल्ली के निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर में। हुआ यों कि यहां के विभाग प्रमुख ने अपने मातहतों को समय की पाबंदी और तथ्यों को लेकर चौकान्ना रहने को कहा था, लेकिन शायद हो न सका। तभी तो मीडिया को भेजे आंकड़े एक दिन कुछ और दूसरे दिन कुछ होते दिखे। दरअसल यह वाकया दिल्ली चुनाव में परचा भरने के आखिरी दिन का था। मीडिया वाले जानना चाह रहे थे कि आखिर कितने उम्मीदवारों ने परचा भरा। विभाग ने जवाब भी दिया और आंकड़े भी दिए। लेकिन जिसे 343 बताया गया था वह अगले दिन 327 निकला। संवाददाता चौंके। जब पूछा गया तो जवाब था, यह सुधार है। इससे यही लगता है कि अफसर चुस्त, मातहत सुस्त हैं।

नामांकन पर चुटकी

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नामांकन में हुई देरी को लेकर चितिंत समर्थकों पर अब आयोग के अधिकारी भी चुटकी ले रहे हैं। एक बड़े अधिकारी ने प्रक्रियाओं में हुई देरी पर सीधा सा जवाब दिया। कहा आयोग का समय तय है। कब नामांकन शुरू होगा और कब खत्म होगा। यब भी पता है कि परिसर में आने के बाद सबका नामांकन होगा। तो हड़बड़ी क्यों, तय नियम व प्रक्रिया का पालन करें। सब ठीक ही होगा। ये तो वही बात है कि बच्चा परीक्षा के लिए देरी से आएगा और अधिक समय की मांग भी करेगा।

जनसंघ और भाजपा

दिल्ली में चुनावी माहौल के बाद एक नया बदलाव भाजपा में नजर आया है। पार्टी ने इस बार जनसंघ और भाजपा नेताओं को एक साथ दिखाने की कोशिश की है। इसकी पहल प्रदेश अध्यक्ष के कार्यालय में लगे एक बोर्ड से हुई है। यह बोर्ड विशेषतौर पर जनसंघ से लेकर अब तक अध्यक्षों के कार्यकाल पर तैयार किया गया है। अब तक केवल अध्यक्ष के कार्यकाल बोर्ड ही पार्टी कार्यालय में नजर आते थे। इस बार जनसंघ की कहानी भी बोर्ड बता रहा है। इन बोर्ड पर जनसंघ की शुरुआत 1951 से लेकर 2016 तक हुए बदलावों की जानकारी दी गई है।
-बेदिल

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