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कोविड से ज्‍यादा आत्‍महत्‍या से गईं जानें, नौकरी गंवाने वालों को मिले 15 हजार रुपए- सपा सांसद ने सदन में उठाई मांग

रामगोपाल यादव ने कहा कि कोरोना काल में कोविड-19 से ज्यादा आत्महत्या से लोगों की जान गई है। ऐसे में बेरोजगार हुए लोग भूखे सोने पर मजबूर हैं। इन लोगों को प्रति माह 15 हजार का भत्ता दिया जाना चाहिए।

Ramgopal yadav, Corona Virus, Rajya Sabha,समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सदन में कोरोना काल के दौरान आत्महत्या की घटनाओं का मुद्दा उठाया।

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने मंगलवार को सदन में कोरोना काल में आत्महत्या से गईं जानों का मुद्दा उठाया। इस दौरान उन्होंने नौकरी गंवाने वालों को 15 हजार रुपये प्रति माह का भत्ता देने की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण देश में बंद हुए कारखानों और व्यवसाय बंद होने से करोड़ो लोग बेरोजगार हुए हैं। ऐसे में उन लोगों के बच्चों की पढ़ाई लिखाई तो दूर उन लोगों को भूखे पेट सोने के लिए विवश होना पड़ रहा है। पढ़े लिखे लोगों के लिए जिनके लिए सरकार ने व्यवस्था की है उन्हें पांच साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा रहा है। पांच साल बाद उनकी समीक्षा की जाएगी। वे भी असमंजस में हैं कि रहेंगे या नहीं रहेंगे। इसका नतीजा यह है कि लोगों में अवसाद बढ़ रहा है, निराशा और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। हताश होकर जी रहे लोग आत्महत्या की ओर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मैं उदाहरण देने चाहता हूं कि कोरोना के चलते नोएडा में पिछले चार पांच महीनों में 44 लोगों की मौत हुई है लेकिन 165 लोगों ने आत्महत्या की है।इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार से यह अनुरोध करना चाहता हूं कि जो लोग लॉकडाउन की वजह से नौकरियों से मजदूरी से अलग हो गए हैं। उनको कम से कम प्रति माह 15 हजार रुपये भत्ता के तौर पर दिया जाए ताकि वे लोग भूखे ना मरें और जिंदा बने रह सकें।

यादव ने बेरोजगार हुए लोगों को हर माह 15 हजार रूपए देने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोगों को कुछ तो सहारा मिल सकेगा और वे जीवित रह सकेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम से लेकर पूरब तक हर सरकार ऐसा कर रही है और हमें भी ऐसा करना चाहिए।

उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में कोविड-19 के कारण स्थिति और गंभीर हो गयी है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, हर साल दुनिया भर में आठ लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं और भारत में यह संख्या करीब 1.39 लाख है।

उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि आत्महत्या की कुल घटनाओं में से 15 प्रतिशत भारत में होती हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 2019 में भारत में ऐसे मामलों की संख्या में चार प्रतिशत की वृद्धि हुयी। उन्होंने कहा कि भारत में साढ़े तीन मिनट में आत्महत्या की एक घटना होती है जो काफी दुखद है। शर्मा ने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर सात में से एक व्यक्ति के अवसाद से पीड़ित होने का अनुमान है।

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