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विशेष: सालुमारदा थिमक्का : हरित शपथ की घनी छाया

जीवन का शतवर्ष पूरा कर चुकी थिमक्का अब तक करीब 8000 पेड़ लगा चुकी हैं। इनमें करीब 400 पेड़ बरगद के हैं। आज थिमक्का के प्रयासों से चार किलोमीटर का इलाका इतना हरा-भरा हो गया है कि वहां से गुजरना किसी के लिए भी कभी न भूला जा सकने वाला अनुभव बन जाता है।

कर्नाटक की सालुमारदा थिमक्का जीवन का शतवर्ष पूरा कर चुकी और अब तक करीब आठ हजार पेड़ लगा चुकी हैं।

हरियाली को लेकर इतनी जागरूकता तो अब हर तरफ नजर आने लगी है कि लोग वृक्ष काटने के बजाय उसे बचाने की बात करने लगे हैं। यह जागरूकता कितनी बड़ी है, इसकी एक बड़ी मिसाल हैं कर्नाटक की सालुमारदा थिमक्का।

जीवन का शतवर्ष पूरा कर चुकी थिमक्का अब तक करीब 8000 पेड़ लगा चुकी हैं। इनमें करीब 400 पेड़ बरगद के हैं। आज थिमक्का के प्रयासों से चार किलोमीटर का इलाका इतना हरा-भरा हो गया है कि वहां से गुजरना किसी के लिए भी कभी न भूला जा सकने वाला अनुभव बन जाता है।

थिमक्का की जिंदगी अपने ढर्रे से बीत रही थी कि एक दिन पता चला कि थिमक्का कभी मां नहीं बन सकेंगी। लोगों के ताने से हालात यहां तक पहुंच गए कि थिमक्का ने एक दिन आत्महत्या करने का मन बना लिया। ऐसे में थिमक्का के पति ने उनका साथ दिया। दोनों ने पेड़ लगाने का फैसला किया और उनकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करने लगे। यह पहल आज पूरी दुनिया के लिए एक हरित सीख बन चुकी है।

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