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Joseph Anton का नाम रखकर छह माह में 56 बार सलमान रुश्दी ने बदली थी रिहाइश, थरूर ने कही ये बात

सलमान रुश्दी शुक्रवार शाम से वेंटिलेटर पर थे। हमले के चलते उनके लीवर को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा एक आंख खोने का खतरा है।

Joseph Anton का नाम रखकर छह माह में 56 बार सलमान रुश्दी ने बदली थी रिहाइश, थरूर ने कही ये बात
नॉवेल लेखक सलमान रुश्दी(फोटो सोर्स:AP/PTI)

लेखक सलमान रुश्दी पर न्यू यॉर्क में एक संबोधन के दौरान हमला किया गया। सलमान रुश्दी जब मंच पर अपने संबोधन के लिए पहुंचे थे, इसी दौरान हमलावर ने लेखक पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया। पुलिस ने हमलावर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। सलमान रुश्दी की हालत नाजुक है और वह वेंटीलेटर पर हैं। इसके पहले 1988 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने रुश्दी के उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के खिलाफ फतवा जारी किया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई थी।

फतवे में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने दुनिया के मुसलमानों से पुस्तक के लेखक और प्रकाशकों को जल्दी से मौत के घाट उतारने का आग्रह किया ताकि कोई भी इस्लाम के पवित्र मूल्यों को ठेस पहुंचाने की हिम्मत नहीं करे। लेखक के सिर पर 2.8 मिलियन डॉलर का इनाम रखा गया था और 89 वर्षीय खोमैनी ने कहा था कि जो कोई भी मौत की सजा को अंजाम देने की कोशिश में मारा गया, उसे “शहीद” माना जाना चाहिए, जो स्वर्ग जाएगा।

उस फतवे ने सलमान रुश्दी के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया और लेखक को छिपने के लिए मजबूर कर दिया। अगले 13 वर्षों में रुश्दी ने जोसेफ एंटोन के नाम को अपनाया और छह महीनों में 56 बार आधार बदलते हुए सुरक्षित घरों के बीच चले गए।

सलमान रुश्दी के सहयोगी एंड्रयू वायली ने बताया कि सलमान रुश्दी शुक्रवार शाम से वेंटिलेटर पर थे। हमले के चलते उनके लीवर को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा एक आंख खोने का खतरा है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक सलमान रुश्दी की गर्दन पर चाकू से वार किया गया है। हमलावर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने भी दुख प्रकट किया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “सलमान रुश्दी को छुरा घोंपकर घायल करना पूरी तरह से भयभीत और स्तब्ध करने वाला है। मैं उनके घावों को शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं। हालांकि डूबते हुए दिल के साथ मैं मानता हूं कि उनके लिए जीवन फिर कभी पहले जैसा नहीं हो सकता। एक दुखद दिन। बदतर है अगर रचनात्मक अभिव्यक्ति अब स्वतंत्र और खुली नहीं रह सकती है।”

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