दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में इमारत ढहने की घटना के बाद एमसीडी एक्शन मोड में नजर आ रही है। हादसे में छह लोगों की मौत के दो दिन बाद नगर निगम ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार निगम ने घटनास्थल के आसपास की छह इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माणों की जांच शुरू कर दी है।

मालूम हो कि 30 मई को चार मंजिला इमारत ढहने से उसके बगल में स्थित एक कैंटीन मलबे में दब गई थी। उस समय वहां एक दर्जन से अधिक लोग मौजूद थे, जिनमें अधिकांश मेडिकल और इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स थे। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी।

नियमों का उल्लंघन कर निर्माण कार्य

जानकारी के अनुसार मार्च महीने में दिल्ली पुलिस ने दो बार इस इमारत की छत पर चल रहे अवैध निर्माण को लेकर एमसीडी को चेतावनी दी थी। नियमों के मुताबिक इलाके में केवल स्टिल्ट पार्किंग के साथ तीन मंजिल तक निर्माण की अनुमति है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि आसपास बड़ी संख्या में इमारतें इस नियम का उल्लंघन कर रही हैं।

यह इलाका विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में महरौली थाना पुलिस ने महरौली-छतरपुर क्षेत्र में मौजूद 200 से 300 अवैध निर्माणों को लेकर एमसीडी, बीएसईएस और दिल्ली जल बोर्ड को पत्र भेजे थे।एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम यह समीक्षा करेंगे कि इन अवैध निर्माणों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कुछ स्थानों पर नोटिस जारी किए गए होंगे, कुछ को सील किया गया होगा और कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई भी हुई होगी।”

हादसे वाली जगह के पास ही एक पांच मंजिला खाली पड़ा इमारत भी मौजूद है, जिसे पहले एमसीडी ने सील किया था। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाद में केवल उसके पोर्च का कुछ हिस्सा तोड़ा गया और सील हटा दी गई, जबकि पूरी इमारत को गिराया जाना चाहिए था।

हर इमारत में नियमों की अनदेखी

स्थानीय छात्रों का कहना है कि इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे हैं। कई भूमिगत लाइब्रेरी भी कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन में संचालित हो रही हैं। एक छात्र ने बताया, “यहां लगभग हर इमारत में नियमों की अनदेखी हो रही है। फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं और भूमिगत लाइब्रेरी में वेंटिलेशन तक नहीं है। पिछले साल एक ऐसी लाइब्रेरी में आग भी लगी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”

हादसे का प्रत्यक्षदर्शी रहे एक छात्र ने कहा, “अगर यह घटना किसी व्यस्त समय में होती तो नुकसान कहीं अधिक बड़ा हो सकता था। जिस इमारत पर निर्माण कार्य चल रहा था, वहां मजदूर मौजूद थे और पास के को-वर्किंग स्पेस में छात्र भी रहते हैं।”

एमसीडी के एक अन्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि इलाके में लंबे समय से अवैध निर्माण होते रहे हैं। उन्होंने कहा, “राय पिथौरा किले के आसपास का 100 से 300 मीटर का क्षेत्र पहले खाली पड़ा रहता था। समय के साथ लोगों ने वहां अतिक्रमण कर लिया और बिना अनुमति के निर्माण शुरू कर दिए।”

अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई

ढही हुई इमारत के मामले में अधिकारी ने बताया कि संबंधित इंजीनियर ने समय रहते विभाग को जानकारी नहीं दी। अधिकारी ने कहा, “इमारत गिरने के बाद जब रिपोर्ट मांगी गई तो इंजीनियर ने दावा किया कि उसने 27 मई को निरीक्षण किया था, लेकिन उस दिन की कोई रिपोर्ट कार्यालय में जमा नहीं की गई थी।” फिलहाल एमसीडी पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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