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कांग्रेस को बचाना PK के लिए मुश्किल, पत्रकार ने बताई वजह, ट्विटर पर लोग भी गिनाने लगे तर्क

सागरिका घोष ने अपने लेख में कहा है कि कांग्रेस की स्थिति दूसरे क्षेत्रीय दलों जैसी भी नहीं है जिसे आसानी से उबारा जा सके। इसलिए प्रशांत किशोर के लिए पार्टी की रीब्रैंडिंग करना भी घाव पर पट्टी बांधने जैसा है।

Photos: PTI, Indian Express and Social Media

कांग्रेस पार्टी के अंदर कई राज्यों में उठा-पटक की खबरें आ रही हैं। हाल ही में पंजाब में सियासी उबाल के बीच नवजोत सिंह सिद्धू को पीसीसी का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह इस फैसले से खुश नहीं नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस पार्टी जॉइन करने के भी कयास लगाए जा रहे हैं। बीते दिनों उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से बात भी की थी।

पत्रकार सागरिका घोष ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे एक लेख में कहा है कि अब इतनी पुरानी कांग्रेस की डूबती नैया किनारे लगाने के लिए प्रशांत किशोर का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस में पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी एक ही परिवार के लिए ‘आरक्षित’ कर दी गई है। दो बार आम चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह हार हो चुकी है। पार्टी एक मजबूत विपक्ष बनकर भी भाजपा के सामने नहीं खड़ी हो पाई।

घोष ने लिखा कि प्रशांत किशोर ने 2014 में मोदी के लिए काम किया। इसके बाद 2015 में नीतीश के लिए, 2017 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए, 2019 में आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी के लिए और फिर 2021 में ममता बनर्जी के लिए। इन सभी राज्यों में खास बात यह थी की यहां के क्षेत्रीय दलों की पकड़ मजबूत थी। वहीं भाजपा की बात करें तो संघ की वजह से उसने अपनी जड़ें मजबूत कर रखी थीं। हालांकि कांग्रेस की स्थिति कुछ और है। सागरिका ने लिखा कि न तो राहुल गांधी ममता बनर्जी के सरीखे हैं औऱ न ही कांग्रेस टीएमसी की तरह। कांग्रेस में अब गांधी परिवार के चेहरे अप्रासंगिक हो गए हैं और राज्यों के नेताओं के चेहरे बड़े हो गए।

2017 के यूपी चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने जोर लगाया था लेकिन यूपी में ‘दो लड़के’ फ्लॉप हो गए। कांग्रेस की रीब्रांडिंग करना उसी तरह है जैसे कि घाव पर पट्टी बदलना। उन्होंने कहा कि 250 जिलों में कांग्रेस की ठीक से जिला समिति भी नहीं है। कांग्रेस के नेताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी रिटायरमेंट के करीब हैं, वहीं प्रियंका गांधी ने आजतक चुनाव में जोर ही नहीं आजमाया। राहुल गांधी ने अपने परिवार की पुरानी सीट अमेठी भी गंवा दी। ऐसे में ये लोग कैसे मोदी के खिलाफ खड़े हो पाएंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी फैक्टर उतना प्रभावी नहीं था, बावजूद इसके कांग्रेस कोई कमाल नहीं कर पाई। छत्तीसगढ़ को छोड़ दें तो सभी राज्यों में उसे नुकसान उठाना पड़ा। वह सलाह देती हैं कि प्रशांत किशोर अगर सही में कांग्रेस की रीब्रांडिंग करना चाहते हैं तो पहले गांधी परिवार को छोड़कर राज्यों के बड़े चेहरों को आगे लाना होगा।

सागरिका के ट्विटर पोस्ट पर राहुल मुखर्जी नाम के यूजर ने लिखा कि यूपी में हार के बाद प्रशांत किशोर और चतुर हो गए हैं। अब वह उसी का साथ देते हैं जो जिताऊ होते हैं और जिनका जनाधार होता है। ऐसे में वह कांग्रेस का साथ कैसे दे सकते हैं? दूसरे यूजर ने लिखा पीके कोई भगवान या जादूगर नहीं हैं जो कि कांग्रेस को उबार सकें। केवल वोटर ही कांग्रेस या भाजपा को उठा-गिरा सकते हैं।

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