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‘सफर’ ने दी चेतावनी: अगले दो दिन तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा रहेगी जहरीली: पराली के कारण बिगड़ेगी हालत

दिल्ली में सोमवार सुबह के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 232 दर्ज किया गया। इस दिन शाम तक चांदनी चौक में हवा बहुत (342) खराब दर्ज की गई। नोएडा का भी यही हाल था, जहां एक्यूआइ 300 के पार रहा।

Author नई दिल्ली | Updated: October 20, 2020 5:19 AM
मनाही के बावजूद पराली जलाने से दिल्ली की हवा जहरीली होने की स्थिति में पहुंच गई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सोमवार सुबह ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। हालांकि हवा की अनुकूल गति के कारण प्रदूषण के स्तर में मामूली कमी आई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली (सफर) ने शहर के प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान जताया है, जिससे 21 व 22 अक्तूबर को हवा बहुत खराब दर्जे की रहेगी। सफर के मुताबिक, सोमवार के प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी 10 फीसद रही।

सफर ने बताया कि रविवार को पराली जलाने की 1,230 घटनाएं हुईं जो इस मौसम में एक दिन में पराली जलाने की अब तक की सबसे ज्यादा घटनाएं हैं। हालांकि सोमवार को इसमें मामूली गिरावट रही और इस दिन पराली जलाने की 1090 घटनाएं दर्ज की गर्इं। दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषक कणों में पराली जलाने की हिस्सेदारी रविवार को 17 फीसद थी। शनिवार को यह 19 फीसद थी इससे पहले 18 फीसद और मंगलवार, सोमवार और रविवार को करीब तीन फीसद थी।

दिल्ली में सोमवार सुबह के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 232 दर्ज किया गया। इस दिन शाम तक चांदनी चौक में हवा बहुत (342) खराब दर्ज की गई। नोएडा का भी यही हाल था, जहां एक्यूआइ 300 के पार रहा। सोमवार को दिल्ली के अधिकांश इलाकों में एक्यूआइ का स्तर ढाई सौ से भी अधिक रहा। पूसा में 273,आइआइटी में 283, मथुरा रोड 290, दिल्ली विश्वविद्यालय में 283 रहा।

रविवार को 24 घंटे के दौरान औसत गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 254 दर्ज किया गया। शनिवार को यह 287 दर्ज किया गया था। शुक्रवार को यह 239, बृहस्पतिवार को 315 दर्ज किया गया था, जो इस वर्ष 12 फरवरी के बाद से सबसे ज्यादा खराब है। उस दिन एक्यूआइ 320 था। वायु गुणवत्ता शून्य से 50 के बीच ‘अच्छी’, 51 से 100 तक ‘संतोषजनक’, 101 से 200 तक ‘मध्यम’, 201 से 300 तक ‘खराब’, 301 से 400 तक ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ मानी जाती है।

वायु गुणवत्ता और गिरेगी : ईपीसीए
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने वायु गुणवत्ता के और खराब होने का अनुमान जताते हुए सोमवार को उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार से ऐसे थर्मल पावर संयंत्रों को बंद करने के लिए तैयार रहने को कहा है जो 2015 में तैयार मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।

प्राधिकरण के प्रमुख भूरेलाल ने दो अलग-अलग पत्रों में दोनों राज्यों की सरकारों से थर्मल पावर संयंत्रों को बंद करने की तैयारियों की समीक्षा करने और इसकी जानकारी ईपीसीए को देने के लिए कहा। इसके अलावा ने प्राधिकरण ने दोनों राज्यों को कड़ाके की सर्दियों के दौरान आवश्यक बंद का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की भी जानकारी देने को कहा है।

लाल ने कहा, ‘आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है, लिहाजा इस पत्र के जरिये मैं यह बताना चाहता हूं कि हमें 2015 में स्थापित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले थर्मल ऊर्जा संयंत्रों को बंद करने का निर्देश देने पड़ सकते हैं।’ उन्होंने कहा, मैं यह पत्र लिखकर आपसे इससे संबंधित तैयारियों की समीक्षा करके ईपीसीए को इसकी जानकारी देने का अनुरोध करता हूं।

आपसे अनुरोध है कि आप कड़ाके की ठंड के मौसम में आवश्यक बंद का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की भी जानकारी दें।’ दोनों राज्यों के प्रमुख सचिवों को लिखे पत्र में लाल ने हरियाणा के पांच और उत्तर प्रदेश के तीन विद्युत संयंत्रों को 2015 में स्थापित मानकों के पालन को लेकर सूचीबद्ध किया है। (एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

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