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राम की मूर्ति: साधुओं ने प्रस्ताव पारित कर खारिज किया आदित्यनाथ का प्लान, शंकराचार्य बोले- हिंदू धर्म को सांप्रदायिक ताकत बनाना चाहती है योगी और मोदी सरकार

भगवान राम की मूर्ति बनाने के फैसले पर शंकराचार्य ने कहा कि योगी और मोदी सरकार हिंदू धर्म को सांप्रदायिक ताकत बनाना चाहती है।

तीन दिवसीय धर्म संसद में सैकड़ों साधु-संत (Photo: PTI)

यूपी के वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय धर्म संसद में सैकड़ों साधु-संत पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार, दोनों ही भगवान राम का अपमान कर रही हैं। साधुओं का यह आरोप ऐसे वक्त में सामने आया है जब सूबे की सत्ताधारी बीजेपी ने अयोध्या में भगवान राम की एक बेहद विशाल मूर्ति लगाने का फैसला किया है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एक साधु तो इतने नाराज थे कि उन्होंने रविवार को अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित धर्म सभा को ‘अधर्म सभा’ करार दे दिया। बता दें कि अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में अधिकतर वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई टालने की आलोचना की थी।

अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी में इकट्ठा हुए साधुओं को ऐसा लगता है कि राम और सरदार पटेल में होड़ पैदा करने की कोशिश की जा रही है। वाराणसी के साधु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति भगवान का अपमान है। पक्षी और जीव-जंतु खुले में लगी मूर्ति के आसपास घूमेंगे। भगवान की मूर्ति सिर्फ मंदिर में रखी जा सकती है जो चारों ओर से घिरी हो।’ बता दें कि वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से हुआ है। स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, ‘बीजेपी सरकार भगवान राम को सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिस्पर्धा में उतारना चाहती है। पटेल ने कुछ सूबों का विलय कराया था जबकि भगवान राम पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं।’

बता दें कि बीजेपी सरकार ने हाल ही में गुजरात में देश के पहले गृहमंत्री की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा लगवाई है। शंकराचार्य ने कहा कि भगवान राम राजनेता नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘हिंदुओं को उनकी मूर्ति की जरूरत नहीं है। मुझे नहीं पता कि आदित्यनाथ को हिंदू धर्म की समझ है कि नहीं। हमें यह जानने की जरूरत है कि आखिर क्यों अयोध्या में राम की मूर्ति लगाने का फैसला हिंदू विरोधी है। मोदी और योगी सरकारें हिंदू धर्म को सांप्रदायिक ताकत में बदलने की कोशिश कर रही हैं।’ बता दें कि वाराणसी में इकट्ठे हुए साधुओं ने अयोध्या में राम की प्रतिमा लगाने की योजना के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास किया।

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