चीन अधिकृत तिब्बत से नेपाल में आई अचानक भीषण बाढ़ में सद्गुरु जग्गी वासुदेव की कैलाश मानसरोवर यात्रा का हिस्सा रहे एक ग्रुप के लोग तिब्बत में फंस गए हैं। सद्गुरु ने बाढ़ की त्रासदी को लेकर किए ट्वीट में यह बताया है कि उनका एक ग्रुप तिब्बत में फंसा है जिसमें 700 से अधिक लोग हैं जबकि 150 के करीब नेपाल में फंसे हैं।

सद्गुरु ने ट्वीट कर बताया कि हमारा एक कैलाश ग्रुप इस बाढ़ में फंस गया है। उन्होंने बताया कि कैलाश यात्रा से वापस आते समय इस जल प्रलय में हमारा एक कैलाश ग्रुप इसमें फंस गया था। वह लोग इमिग्रेशन ऑफिस में थे जब बाढ़ आई और ऐसा लगता है कि बिल्डिंग और शहर का अधिकतर हिस्सा पानी में डूब गया है, हमारा उन सभी में से किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

‘हम राहत बचाव कार्य में मदद करना चाहते हैं’

सद्गुरु ने आगे कहा कि हम सभी वॉलंटियर्स और सपोर्ट टीमों सहित राहत बचाव में मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है। हम अधिकारियों के साथ मिलकर यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम उस जगह तक पहुंच सकते हैं और बचाव के कामों का हिस्सा बनने के लिए तैयार रह सकते हैं, चाहे इसमें कितना भी रिस्क क्यों न हो।

500 के करीब लोग पहले ही सुरक्षित लौट गए

सद्गुरु ने बताया कि कैलाश यात्रा में हमारे साथ 21 ग्रुप गए थे जिसमें से 495 लोग पहले ही सुरक्षित लौट गए हैं। जिस वक्त यह बाढ़ आई उस वक्त 743 लोग तिब्बत में थे, 148 लोग नेपाल में हैं और 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर में थे और 3 वॉलंटियर्स नेपाल के तिमुरे में थे।

ग्राउंड जीरो पर हैं सद्गुरु

सद्गुरु ने आखिर में कहा है कि हमारे ग्रुप के लोगों और इस इलाके में प्रभावित सैकड़ों दूसरे लोगों के परिवारों और प्रियजनों के लिए हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं, हम इस बहुत मुश्किल समय में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मैं खुद इस इलाके में हूं ताकि यह सुनिश्चित कर सकूं कि मौजूदा हालात में सबसे अच्छा किया जा सके।

बाढ़ के कारण 100 के करीब लोगों की मौत

बता दें कि चीन अधिकृत तिब्बत से आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। नेपाल के डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की ओर से जारी किए गए एक बयान में बताया गया है कि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी कैचमेंट एरिया में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा होने से हालात काफी खराब हो गए हैं। चीन-नेपाल बॉर्डर पर भी भारी नुकसान की आशंका है। बाढ़ की वजह से नेपाल में 100 के करीब लोगों की मौत हो गई है।

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भयानक तबाही मचाने वाली इस सीमापारीय नदी का उद्गम तिब्बत के शिशापांगमा पर्वत पर स्थित झांगझांगबो ग्लेशियर से होता है। तिब्बत में इसे पोइकु’ या ‘बोक्शू कहा जाता है। यहां से यह मनमोहक घाटियों और दर्रों से बहती हुई नेपाल में रसुवा और सिंधुपालचौक जिलों में प्रवेश करती है। यहां पढ़ें पूरी खबर…