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सैक्रेड गेम्‍स में राजीव गांधी के खिलाफ अपशब्‍द हटाने के पक्ष में नहीं केंद्र! कहा- अभिव्यक्ति की आजादी

सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा के कई फैसलों का भी जिक्र किया, जिनमें अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व को रेखांकित किया गया है।

सैक्रेड गेम्स वेब सीरीज में राजीव गांधी को लेकर हुए विवाद पर सरकार ने दिया हलफनामा।

मशहूर वेब सीरीज सैक्रेड गेम्स में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अपशब्द हटाने का मामला अदालत पहुंच गया है। एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल कर वेब सीरीज से विवादित सीन हटाने की मांग की गई है। हालांकि वेब सीरीज को अब सरकार का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। दरअसल सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दिए अपने हलफनामे में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने कहा है कि “संविधान की प्रस्तावना में भारत में विचारों, अभिव्यक्ति, आस्था, पूजा की पूरी आजादी है। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। हमारे संविधान में लोगों को अपने विचारों की अभिव्यक्ति की पूरी आजादी दी गई है।” सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा के कई फैसलों का भी जिक्र किया, जिनमें अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व को रेखांकित किया गया है।

अदालत में ये याचिका वकील निखिल भल्ला द्वारा दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि अदालत सैक्रेड गेम्स वेब सीरीज का निर्माण करने वाले नेटफ्लिक्स इंटरटेनमेंट, वेब सीरीज के निर्माता फैंटम फिल्म्स प्रोडक्शन लिमिटेड और केन्द्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दे कि वेब सीरीज से कथित आपत्तिजनक सीन हटाए जाएं। बता दें कि सैक्रेड गेम्स वेब सीरीज में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर कई आपत्तिजनकर बातें कही गई हैं, जिनमें बोफोर्स घोटाला, शाहबानो मामला, बाबरी मस्जिद मामला जैसे मुद्दे शामिल थे। यह वेबसीरीज 1980 के बैकड्रॉप में बनायी गई है। बीती 6 जुलाई को यह भारत सहित दुनिया के 190 देशों में रिलीज हुई थी।

इसके खिलाफ कांग्रेस नेताओं समेत कई लोगों ने इस पर आपत्ति जतायी थी और इसे पूर्व प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश करार दिया था। हालांकि वेब सीरीज के निर्देशक अनुराग कश्यप ने इन आरोपों से इंकार किया था और कहा था कि ‘यह वेब सीरीज किसी राजनेता को टारगेट करने के लिए नहीं बनायी गई है। ये सिर्फ हमारा नजरिया है, जो उन दिनों हुए घटनाक्रम को दर्शाता है, चाहे वो राजनैतिक हो या फिर धार्मिक। अगर किसी को इससे आपत्ति है तो ये उनकी दिक्कत है।’ फिलहाल अदालत ने इस मामले पर सुनवाई आगामी 20 दिसंबर तक के लिए टाल दी है।

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