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रुपहला पर्दा, दक्षिण भारतीय फिल्मजगत: इतना अनुशासित फिर भी महिलाएं असुरिक्षत

दक्षिण के चारों फिल्म उद्योग, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम- बहुत अनुशासित हैं। बार-बार उनका उदाहरण दिया जाता है कि वहां कलाकार समय पर सेट पर उपस्थित होते हैं। कम समय में फिल्में बना ली जाती हैं। फिल्म निर्माण से जुड़े सभी पक्ष जिम्मेदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं। इतने सुव्यवस्थित उद्योग में अभिनेत्रियों का लगातार आत्महत्या करना, इसका सबसे कमजोर पक्ष है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर दक्षिण भारतीय फिल्मजगत इतना अनुशासित है, तो अभिनेत्रियों के लिए इतना असुरक्षित क्यों बना हुआ है?

दक्षिण भारतीय सिनेमा में कामकाज का शानदार तरीका होने के बावजूद अभिनेत्रियों की सुरक्षा को लेकर बेहद आशंकाएं कायम रहती हैं।

दिसंबर 2020 की नौ तारीख की सुबह चैन्नई के नाजरथपेट स्थित एक होटल में टीवी अभिनेत्री वीजे चित्रा मृत पाई गईं। पुलिस ने पोस्टमार्टम का हवाला देकर इसे आत्महत्या बताया। ‘पांडियन स्टोर्स’ नामक सोप आपेरा से मशहूर चित्रा के परिवार के लोगों ने हत्या का अंदेशा जताया और उनके कारोबारी पति को इसके लिए जिम्मेदार कहा, जिससे चित्रा ने कुछेक दिन पहले ही शादी की थी।
दक्षिण भारतीय फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं इतनी ज्यादा है कि चिंता पैदा करती है, सवाल खड़े करती हैं। तीन महीने पहले ही आठ सितंबर को मधुरनगर हैदराबाद में तेलुगू अभिनेत्री सर्वणी ने आत्महत्या कर ली थी। वह आठ सालों से टीवी धारावाहिकों में काम कर रही थीं और खूब लोकप्रिय भी थीं। इसे भी आत्महत्या कहा गया जबकि सर्वणी के भाई का कहना है कि उसकी बहन ने बताया था कि कोई उसे ब्लैकमेल कर रहा था।

मनोरंजन की दुनिया में लोकप्रिय फिल्म अभिनेताओं की आत्महत्या की घटनाएं उंगलियों पर गिनी जा सकती हैं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से पहले अगर किसी लोकप्रिय फिल्म अभिनेता द्वारा आत्महत्या करने की घटना तलाशें, तो सीधे गुरु दत्त (1964) तक ही जाना पड़ता है। मगर तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं दशकों से चली आ रही हैं। 70 के दशक में दक्षिण की मर्लिन मुनरो कही जाने वाली विजयश्री की रहस्यमय स्थितियों में 1974 में मौत हुई। सबसे महंगी इस अभिनेत्री के यहां निर्माताओं का तांता लगा रहता था। कहते हैं कि एक ताकतवर निर्माता ने उसकी कुछ अशालीन तसवीरें खींच रखी थीं।

मलयाली मूल की विजयश्री ने 40 के करीब मलयालम फिल्मों के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में भी काम किया। 1979 में कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री कल्पना ने नींद की 56 गोलियां खाकर जान दी। वह जिस निर्देशक से प्यार करती थीं, उसने दूसरी अभिनेत्री को महत्व देना शुरू कर दिया था। जीवन के अंतिम दौर में कल्पना को आर्थिक संकटों का सामना भी करना पड़ा।

1978 में ‘पसी’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली मलयालम अभिनेत्री शोभा 1 मई, 1980 को उस घर में मृत मिली, जिसमें वह निर्देशक बालू महेंद्र के साथ रह रही थीं। शोभा बामुश्किल 18 साल की थीं। शोभा की अभिनेत्री मां प्रेमा ने 75 के करीब फिल्मों में काम किया और 1984 में उन्होंने भी आत्महत्या की।

तमिल तेलुगू अभिनेत्री फटाफट जयलक्ष्मी ने पंखे से लटककर जान दी। वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन के भाई एमजी चक्रपाणि के बेटे एमजी सुकुमारन से शादी करना चाहती थीं। सार्वजनिक रूप से यह रिश्ता तोड़ा गया। 22 साल की उम्र में पहले उन्होंने नींद की ज्यादा गोलियां खाईं, ठीक होने पर पंखे से लटकी मिलीं।

सातवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने वाली तमिल अभिनेत्री सुनंदिनी, सिर्फ एक फिल्म में काम करके नींद की गोलियां खाकर जान देने वाली तमिल अभिनेत्री पुष्पा, ‘बदरी’ जैसी हिट फिल्म करने वाली सिमरन की बहन मोनल नवल या पंखे से लटककर जान देने वाली लोकप्रिय तमिल अभिनेत्री सिल्क स्मिता…सूची बहुत लंबी है। दक्षिण की चारों फिल्म इंडस्ट्रियों की इसलिए तारीफें होती हैं कि वहां अनुशासित तरीके से काम किया जाता है। कम समय में फिल्में तैयार हो जाती हैं। मगर कामकाजी जगह पर अभिनेत्रियों के शोषण के लिए भी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री सुर्खियों में रही है।

दक्षिण में फिल्में देखने का लोगों में जुनून है। कलाकारों के अपने फैन क्लब हैं, जो प्रशंसकों की जमात तैयार करते हैं और इसके दम पर कलाकार की साख बनाते हैं। ये प्रशंसक सितारों को भगवान मानते हैं और उनके निधन पर कई बार इतने आहत होते हैं कि जान तक दे देते हैं। मगर इस फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के शोषण के किस्सों की भी कमी नहीं है। दक्षिण की फिल्म इंडस्ट्री इतनी अनुशासित है तो फिर लंबे समय से महिलाओं के लिए असुरक्षित क्यों बनी हुई है, यह सवाल अब पूछे जा रहे हैं।

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