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हमारी याद आएगी-सावित्री: हीरोइन के हस्ताक्षर से खुला शादीशुदा होने का राज

तेलुगु में 138, तमिल में 100, कन्नड़ में आठ, तीन मलयालम और पांच हिंदी फिल्मों (बहुत दिन हुए, घर बसा के देखो, गंगा की लहरें, बलराम श्रीकृष्ण, अमरद्वीप), कुल मिलाकर लगभग ढाई सौ फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री, गायिका, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक सावित्री अपनी बेमिसाल सुंदरता और बेजोड़ अभिनय के कारण तीन दशकों तक सिनेमाप्रेमियों के दिलों पर राज करती रहीं। ‘महानटी’ कहलाई जाने वाली सावित्री ने 1954 की जेमिनी स्टूडियो की फिल्म ‘बहुत दिन हुए’ में मधुबाला के साथ भी काम किया था। कल उनकी 39वीं पुण्यतिथि है।

sabrangसावित्री अपनी बेमिसाल सुंदरता और बेजोड़ अभिनय के कारण तीन दशकों तक सिनेमाप्रेमियों के दिलों पर राज करती रहीं

फिल्म अभिनेत्रियों को लेकर आम धारणा है कि शादी करने के बाद उनका कैरियर लगभग खत्म हो जाता है। कुछ अपवाद भी हैं, जिनमें से एक रही हैं तमिल और तेलुगू फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री सावित्री। बेमिसाल सुंदरता और बेजोड़ अभिनय के लिए जानी गईं सावित्री ने तीन दशकों तक तमिल और तेलुगू फिल्मों में काम किया। कमल हासन ने बाल कलाकार के रूप में सावित्री की फिल्म ‘कलातुर कन्नम्मा’ (1959) से करियर शुरू किया था।

सावित्री ने हीरो के बराबर मेहनताना लिया और वैसा ही सम्मान भी पाया। खूब पैसा कमाया, खुले हाथों से खूब उड़ाया। कारें खरीदीं। जमीन-जायदाद में पैसा डाला। आभूषणों पर पानी की तरह पैसा बहाया। जरूरतमंदों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए। बड़े-बड़े निर्माता और नामीगिरामी हीरो शूटिंग के लिए उनकी तारीखें मिलने का इंतजार करते थे। तमिल और तेलुगू सिनेमाप्रेमी उन पर कुर्बान थे। सावित्री ने अपार लोकप्रियता हासिल की।

शादी भी की तो तमिल-तेलुगू फिल्मजगत में रोमांस का बादशाह कहे जाने वाले जैमिनी गणेशन से, जो शादीशुदा थे और जिनकी पहली शादी से चार बेटियां थीं। गणेशन शादीशुदा। सावित्री से शादी कर रहे थे और साथ-साथ एक और हीरोइन से भी प्रेम कर रहे हैं। यह हीरोइन थीं पुष्पवल्ली (हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री, रेखा की मां)। मगर जैमिनी गणेशन से शादी के बाद सावित्री का कैरियर ढलने के बजाय चढ़ने लगा। उनकी फिल्में हिट हो रही थीं और फिल्मप्रेमी उनके दीवाने। 50 के दशक में गणेशन और सावित्री की जोड़ी वाली फिल्में भी खूब चलीं।

चोरी-छिपे की गई सावित्री-जैमिनी की शादी 1952 में जमाने के सामने आई एक हस्ताक्षर से। एक विज्ञापन के लिए सावित्री ने अनुबंध किया था। इस अनुबंध पर उन्होंने ‘सावित्री गणेश’ नाम से हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद मीडिया में दोनों की शादी सुर्खियां बन गईं। फिल्म इंडस्ट्री किसी फनकार को अर्श पर पहुंचाती है, तो फर्श पर लाने में भी देर नहीं लगाती है। शादी के बाद चोटी की हीरोइन बनी सावित्री का करिअर 1968 में तब नीचे आना शुरू हुआ, जब वह निर्माता बन गईं। 1968 में उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘चिन्नारी पपलू’ का निर्देशन किया।

मगर बतौर निर्माता-निर्देशक उन्हें सफलता नहीं मिली। बुरे दिन शुरू हुए तो टैक्स को लेकर छापों में उनकी अचल संपत्तियां सील हो गईं। कारें बिक गईं। देखते ही देखते जो कुछ कमाया था, सब चला गया।

हालात इतने बुरे हो गए कि सावित्री ने जो सामने आई उस फिल्म में काम करना शुरू कर दिया। पति जैमिनी गणेशन से संबंध बिगड़े। शराबनोशी की आदत उनके करिअर को तबाह कर रही थीं। कहा जाता है कि एक बार तो सेट पर उन्होंने एक निर्माता के शर्ट पर शराब फेंक दी और अगले दिन पश्चाताप करते हुए निर्माता के पास नई शर्ट लेकर पहुंची। कुल मिलाकर सावित्री के करिअर का चढ़ता सूरज अस्त होने लगा। दसारी नारायण राव को छोड़ सारे निर्माता उनसे दूर होने लगे और जीवन के आखिरी दौर में सावित्री कोमा में चली गईं। 19 महीने कोमा में रहने के बाद 26 दिसंबर 1981 को उनका निधन हो गया।

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