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RBI बोर्ड के सदस्‍य बोले- पब्लिसिटी स्‍टंट के लिए सबरीमाला मंदिर जा रहीं महिलाएं

Sabarimala Temple Case News Today: गुरुमूर्ति ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, ''मीडिया के लिए सबरीमाला अब प्रतिष्ठा का लड़ाई है। बस अहम की लड़ाई। महिलाओं के अधिकारों से अब यह एक, दो या तीन महिलाओं के अधिकारों बनाम लाखों महिलाओं की सहनशीलता की लड़ाई बन चुका है। जो महिलाएं वहां जाती हैं उनके लिए यह बस पब्लिसिटी स्टंट है। कोई श्रद्धा नहीं, कोई धर्म नहीं, बस श्रद्धावानों को शर्मिंदा करना है।''

Sabarimala Temple Case: आरबीआई बोर्ड के सदस्य स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के जाने को पब्लिसिटी बताया है। (Image Source: PTI)

Sabarimala Temple Case News Today: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बोर्ड के सदस्य स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के जाने को पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है। उन्होंने मंदिर विवाद पर मीडिया की भी आलोचना की। गुरुमूर्ति ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, ”मीडिया के लिए सबरीमाला अब प्रतिष्ठा का लड़ाई है। बस अहम की लड़ाई। महिलाओं के अधिकारों से अब यह एक, दो या तीन महिलाओं के अधिकारों बनाम लाखों महिलाओं की सहनशीलता की लड़ाई बन चुका है। जो महिलाएं वहां जाती हैं उनके लिए यह बस पब्लिसिटी स्टंट है। कोई श्रद्धा नहीं, कोई धर्म नहीं, बस श्रद्धावानों को शर्मिंदा करना है।” बता दें कि बीते 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयुवर्ग की महिलाओं के लिए सबरीमाला मंदिर में प्रवेश को अनुमति दे दी थी। 10 से 50 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश को मंजूरी मिलने पर कई संगठन विरोध जता रहे हैं। विरोध में बीजेपी और कांग्रेस नेता भी शामिल बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (18 अक्टूबर) को सबरीमाला कर्म समिति द्वारा बुलाए गए राज्यव्यापी बंद का व्यापक असर दिखाई दिया। इक्का-दुक्का वाहन चलते दिखाई दिए।

बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के द्वारा लाठीचार्ज की खबरें आई थीं। पुलिस की कथित बर्बरता के खिलाफ यह बंद बुलाया गया। भगवान अयप्पा के मंदिर को बुधवार की शाम पांच दिनी मासिक पूजा-अर्चना के लिए खोला गया था। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने की कोशिश कर रही है। वहीं, हिंदूवादी संगठन परंपरा की दुहाई देते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर कथित तौर पर हंगामा कर रहे हैं। महिला पत्रकारों पर भी हमले की खबरें हैं। सबरीमाला के पुजारी परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य ने मीडिया से कहा कि माना जाता है कि अयप्पा ‘ब्रह्मचारी’ थे। इसलिए 10 से 50 साल आयुवर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक की परंपरा का सम्मान करने और महिलाओं से मंदिर में न जाने का आग्रह किया है।

कहा जा रहा है कि बीजेपी इसे राज्य की वामपंथी सरकार के खिलाफ जनमानस तैयार करने का बेहतरीन मौका मानकर चल रही है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सबरीमाला मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के शीर्ष अदालत के फैसले की गुरुवार को आलोचना की। भागवत ने कहा, “यह फैसला सभी पहलुओं पर बिना विचार किए लिया गया, इसे न तो वास्तविक व्यवहार में अपनाया जा सकता है और न ही यह बदलते समय और स्थिति में नया सामाजिक क्रम बनाने में मदद करेगा।” उन्होंने कहा, “लैंगिक समानता का विचार अच्छा है। हालांकि, इस परंपरा का पालन कर रहे अनुयायियों से चर्चा की जानी चाहिए थी। करोड़ों भक्तों के विश्वास पर विचार नहीं किया गया।”

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