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कच्चे तेल की मार से रुपया गिरकर 74.39 पर पहुंचा

सोमवार को रुपया 30 पैसों की गिरावट के साथ 74.06 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी बने रहने से रुपए की धारणा प्रभावित हुई है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,805 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की। इससे भी रुपए पर दबाव बढ़ा।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतिभूति बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी का जोर बने रहने, डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों में लगातार तेजी के कारण मंगलवार को रुपया 74.39 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में आरंभिक कारोबार के दौरान बैंकों व निर्यातकों की ओर से डॉलर की ताजा बिकवाली का जोर चलने से रुपया 18 पैसे मजबूत हो कर 73.88 प्रति डॉलर तक चढ़ गया था।

बाद में प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती के संकेतों और कच्चे तेल का भाव फिर 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने से रुपया दबाव में आ गया। कारोबार के अंत में भारतीय मुद्रा की विनिमय दर सोमवार की तुलना में 33 पैसे गिर कर 74.39 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुई। सोमवार को रुपया 30 पैसों की गिरावट के साथ 74.06 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी बने रहने से रुपए की धारणा प्रभावित हुई है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,805 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की। इससे भी रुपए पर दबाव बढ़ा।

भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान : आइएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने मंगलवार को भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018 में 7.3% और 2019 में 7.4% रहने का अनुमान जताया है। अपनी नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य रपट में आइएमएफ ने कहा कि चालू वर्ष में भारत फिर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा। यह चीन के मुकाबले 0.7% अधिक होगा।
वर्ष 2017 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7% थी। रपट में भारत द्वारा हाल में किए गए आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया है। इसमें माल व सेवाकर (जीएसटी) और दिवाला व शोधन अक्षमता संहिता को लागू करना शामिल है। साथ ही मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर बनाए रखने, विदेशी निवेश के उदारीकरण और कारोबार सुगमता के लिए उठाए गए कदम भी शामिल हैं।

रपट में कहा गया है, ‘भारत की आर्थिक वृद्धि 2018 में 7.3% और 2019 में 7.4% रहने का अनुमान है।’ यह आइएमएफ द्वारा अप्रैल 2018 में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य में जताए गए अनुमान से कम है। इसकी अहम वजह हाल में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होना और वैश्विक आर्थिक हालात का मुश्किल भरा होना बताई गई है। हालांकि यह 2017 के 6.7% की आर्थिक वृद्धि दर से अधिक है।आइएमएफ का कहना है कि आर्थिक वृद्धि में यह सुधार नोटबंदी और जीएसटी लागू करने से लगे झटके के बाद बेहतर हुई स्थिति के चलते हुआ है। साथ ही निवेश और निजी उपभोग बढ़ने का भी असर पड़ा है। रपट में कहा गया है कि यदि सभी अनुमान ठीक रहते हैं तो भारत फिर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त कर सकता है। चीन के मुकाबले भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018 में 0.7% और 2019 में 1.2% अधिक रहने का अनुमान है। वर्ष 2017 में चीन दुनिया की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि वाली अर्थव्यवस्था थी। तब यह भारत से 0.2% आगे थी। हालांकि अप्रैल की रपट में आइएमएफ ने भारत और चीन दोनों की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को क्रमश: 0.4 और 0.32% घटाया था। इस रपट को आइएमएफ और विश्वबैंक की सालाना बैठक के दौरान बाली में जारी किया गया।

रपट में चीन की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान अप्रैल के मुकाबले घटाया गया है। वर्ष 2017 में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान था। 2018 में इसके 6.6% और 2019 में 6.2% रहने का अनुमान जताया है। आइएमएफ ने 2018 में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 2.9% और 2019 में 2.5% रहने का अनुमान भी जताया है। इसके अलावा आइएमएफ ने भारत में मुद्रास्फीति में तेजी आने का भी अनुमान जताया है। 2018-19 के लिए यह अनुमान 4.7% है। आइएमएफ ने चालू वित्त वर्ष के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान घटाते हुए 3.7 फीसद पर स्थिर कर दिया है। उसने कहा कि परिदृश्य पर संशय के बादल मंड़रा रहे हैं और वृद्धि की गति भी उम्मीद से कम संतुलित रही है। आइएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री मौरिस आॅब्स्टफेल्ड ने ‘वैश्विक आर्थिक परिदृश्य’ जारी किए जाने के मौके पर कहा, ‘पिछले अप्रैल में हमने इस साल और अगले साल के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.9 फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया था। उसके बाद हुए बदलावों को देखते हुए यह दर अति-आशावादी प्रतीत होती है। अत: इसे बढ़ाने के बजाय हम 3.7 फीसद पर स्थिर रख रहे हैं।’

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