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दिल्ली भाजपा में बवाल: टीम बनाने में बहाना पड़ रहा पसीना

नए अध्यक्ष आदेश गुप्ता की नई टीम में पार्टी के एक दर्जन से अधिक चेहरे इस बार भी अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं, यह देखा जाएगा। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष कोई भी बने लेकिन ये खास चेहरे हमेशा ही दिल्ली भाजपा की टीम में रहे हैं।

दिल्ली बीजेपी संगठन के लिए टीम बनाने में काफी दिक्कत हो रही है। चहेते नेताओं पर कार्यकर्ताओं की नजर है। जिले के लिए आयु सीमा तय करने पर जोर है।

दिल्ली भाजपा की टीम में हर बार जगह बनाने वाले लोगों पर इस बार कार्यकर्ताओं की खास नजर है। देखा जाएगा कि नए अध्यक्ष आदेश गुप्ता की नई टीम में पार्टी के एक दर्जन से अधिक चेहरे इस बार भी अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष कोई भी बने लेकिन ये खास चेहरे हमेशा ही दिल्ली भाजपा की टीम में रहे हैं।

संभावना है कि माह के अंत तक प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम की घोषणा कर सकते हैं। इस बार इस टीम को सीधे केंद्रीय नेतृत्व की सीधी निगरानी में तैयार किया जा रहा है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि ये चेहरे दिल्ली की राजनीति में 2010 में सक्रिय हुए थे। बीते सालों में भाजपा ने अपने चार प्रदेश अध्यक्षों को विदाई दी है। इन प्रदेश अध्यक्षों में मनोज तिवारी, सतीश उपाध्याय, विजय गोयल व विजेंद्र गुप्ता शामिल थे।

अध्यक्षों के बदल जाने के बाद भी संगठन की मुख्य टीम में अधिक बदलाव देखने को नहीं मिला है। पार्टी के सक्रिय व गिने चुने नामों को ही सभी अध्यक्षों ने तव्वजो दी है। कई नेता मानते हैं कि पार्टी के इस रवैये से ये एक दर्जन चेहरे खुद को बड़ा नेता बना पाए हैं, लेकिन संगठन को जिस जमीनी कार्यकर्ता की जरूरत महसूस हो रही है। वह मजबूत टीम ने पुराने चेहरों के पीछे दबकर रह गई है।

केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार केंद्र की वरिष्ठ नेता विजया राहटकर और वरिष्ठ नेता अरुण सिंह को कमान दी है। ये दोनों ही नेता एक प्रकार से पूर्व नेता अरुण जेतली व सुषमा स्वराज की भूमिका में हैं। जो प्रदेश स्तर की गतिविधियों पर नजर भी रखें और प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व को जोड़ने की कोशिश भी करेंगे। पार्टी सूत्र बताते हैं कि पदों पर तैनात रहे कुछ नेता अपनी सीट नहीं बचा पाए। पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात की नाराजगी है कि पार्टी को इन बड़े नेताओं से इस पर जवाब जरूर मांगना चाहिए।

35 टीमों ने प्रदेश को सौंपी अपनी रिपोर्ट : दिल्ली में इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए पार्टी की तरफ से 35 सदस्यों की एक विशेष टीम बनाई थी। इस टीम को हर मंडल स्तर पर पदाधिकारियों के नाम देने थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही पार्टी में एक निर्धारित आयु सीमा को लेकर मंजूरी देने की बात हुई तो इस पर भी नाराजगी सामने आई थी।

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