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VIDEO: दिल्ली के अस्पताल में हंगामा, उपद्रवियों ने फर्नीचर तोड़ीं, दवाइयां फेंकीं- भागकर डॉक्टरों को बचानी पड़ी जान

एक 6 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद परिजन उसे इलाज कराने यहां लाए थे। इलाज में लापरवाही के आरोप में नाराज परिजनों और लोगों ने अस्पताल के डॉक्टरों तथा सुरक्षाकर्मियों की जमकर पिटाई की।

Author नई दिल्ली | June 19, 2019 10:25 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल में मरीज के परिजनों द्वारा कथित तौर पर पिटाई के हड़ताल अभी समाप्त ही हुआ, और दूसरी ओर दिल्ली से इस तरह का एक दूसरा मामला सामने आ गया। दिल्ली के अस्पताल में जमकर हंगामा किया गया। उपद्रवियों ने अस्पताल के फर्नीचर को तोड़ डाला। दवाइयां फेंक दी। डॉक्टरों ने मौके से भागकर अपनी जान बचायी घटना दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एक 6 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद परिजन उसे इलाज कराने यहां लाए थे। इलाज में लापरवाही के आरोप में नाराज परिजनों और लोगों ने अस्पताल के डॉक्टरों तथा सुरक्षाकर्मियों की जमकर पिटाई की। इस घटना से वहां इलाज करा रहे अन्य मरीज और उनके परिजन भी सहम गए। अस्पताल पूरी तरह रणक्षेत्र बन गया था। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने पूरी स्थिति का मुआयना किया। अस्पताल की सुरक्षा बढ़ा दी गई।

मुखर्जी नगर मामले में उच्च न्यायालय ने कहा- दिल्ली पुलिस का हमला बर्बरता का उदाहरण: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक ऑटो रिक्शा चालक और उसके नाबालिग बेटे पर पुलिस का हमला उसकी (पुलिस की) बर्बरता का उदाहरण है। न्यायमूर्ति जयंत नाथ और न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की पीठ ने कहा, ‘‘आप 15 साल के एक लड़के पर हमले को कैसे उचित ठहरा सकते हैं? यदि यह पुलिस की बर्बरता का उदाहरण नहीं है, तो इससे ज्यादा आपको और क्या चाहिए? ’’

अदालत ने कहा कि यदि पुलिस इस तरह से बर्ताव करेगी तो यह नागरिकों को भयभीत करेगी जिन्हें यह महसूस करने की जरूरत होती है कि पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। आपको यह दिखाना होगा कि आप नागरिकों के साथ हैं। यही चीज बच्चे सहित नागरिक भी चाहते हैं।

इस मामले की स्वतंत्र सीबीआई जांच का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, आप सरकार और दिल्ली पुलिस को अपना रुख बताने के लिए नोटिस जारी करते हुए पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ ने इस घटना के बारे में पुलिस के संयुक्त आयुक्त स्तर के एक अधिकारी से एक हफ्ते में एक स्वतंत्र रिपोर्ट भी मांगी है और मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई के लिए तय कर दी।

गौरतलब है कि रविवार शाम ऑटो चालक सरबजीत सिंह और पुलिसर्किमयों के बीच लड़ाई का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना के एक कथित वीडियो में ऑटो चालक तलवार लेकर पुलिसर्किमयों के पीछे भागते हुए दिखाई दे रहा है। एक अन्य वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी ऑटो चालक और उसके बेटे की डंडों से पिटाई करते दिख रहे हैं। (भाषा इनपुट के साथ)

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