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आरटीआइ: साढ़े पांच साल में दो लाख 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा वसूले गए, निजी से ज्यादा सार्वजनिक बैंकों ने काटी ग्राहकों की जेब

वित्तीय वर्ष 2013-14 से अब तक बैंकों ने दो लाख 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राजस्व वसूली की है। निजी बैंकों ने जहां इन सालों में एक लाख 12 हजार 154 करोड़ रुपए वसूल किए, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एक लाख 76 हजार 278 करोड़ रुपए की वसूली की है।

Author February 12, 2019 6:42 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

गजेंद्र सिंह

तमाम तरह के शुल्क भार लगाकर ग्राहकों की जेब ढीली करने में निजी बैंक से ज्यादा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आगे हैं। न केवल एटीएम से पैसे निकालने बल्कि जमा करने और मोबाइल सुविधा के नाम पर भी ग्राहकों से शुल्क लिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2013-14 से अब तक बैंकों ने दो लाख 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राजस्व वसूली की है। निजी बैंकों ने जहां इन सालों में एक लाख 12 हजार 154 करोड़ रुपए वसूल किए, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एक लाख 76 हजार 278 करोड़ रुपए की वसूली की है। सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की ओर से बताया गया कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार विभिन्न प्रकार की सेवाओं पर सेवा प्रभार तय करने की स्वतंत्रता दी गई है। हालांकि आरबीआइ का कहना है कि नियम के अनुसार सेवा प्रभार तय करते समय बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभार उचित हो और औसत लागत से अधिक न हो। आरबीआइ ने जवाब में यह भी बताया कि बैंक ग्राहकों को पहले से ही सेवा प्रभारों की जानकारी देंगे और सेवा प्रभारों में परिवर्तन के बारे में ग्राहकों को पूर्व सूचना देने के बाद उसे लागू करेंगे।

वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2017-18 और एक अप्रैल, 2018 से 30 सितंबर, 2018 के दौरान सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बैंकों द्वारा रिपोर्ट किए गए अन्य परिचालन आय शुल्क में आय में कमीशन, एक्सचेंज और ब्रोकरेज भी शामिल है। बैंक यूनियन से जुड़े संजीव मेहरोत्रा बताते हैं कि नेट बैंकिंग से पैसे बाकी पेज 8 पर भेजने, चेक बुक जारी करने, मोबाइल सुविधा व अन्य कई तरह की सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जाता है। मेहरोत्रा बताते हैं कि एसबीआइ और बैंक आॅफ बड़ौदा खाते में न्यूनतम बैंलेंस 3000 से कम रखने पर और अन्य बैंक 1000 रुपए से कम रखने पर 100 रुपए से अधिक का शुल्क लेते हैं। इसी तरह चेक वापसी पर तो दोनों पक्षों से सरकारी बैंक दो से 300 रुपए और निजी बैंक 550 रुपए शुल्क वसूल करते हैं।

बैंकों का भरा खजाना
वित्तीय वर्ष    सार्वजनिक बैंक     निजी बैंक
2013-14         28,374 रु          21,172 रु
2014-15         29,174रु            16091 रु
2015-16           31,143रु         18,244 रु
2016-17           34,927रु          20,133 रु
2017-18            36,219रु        23,409 रु
2018                  16,441 रु         13,475 रु

(नोट- आरबीआइ द्वारा दी गई जानकारी में रुपए करोड़ में हैं। वित्तीय वर्ष 2018 के आंकड़े अप्रैल से सितंबर तक के हैं।)

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