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मदर टेरेसा के एनजीओ पर बच्‍चा चोरी के आरोप, आरएसएस नेता ने कहा- दोषी हों तो छीन लिया जाए भारत रत्‍न

तुली के अनुसार, मदर टेरेसा ने, जिन्हें बीते साल वेटिकन सिटी द्वारा संत की उपाधि दी गई थी, जनकल्याण का कोई काम नहीं किया था और उनका एजेंडा धर्मांतरण ही था।

आरएसएस नेता का बयान यदि चैरिटी के खिलाफ आरोप सही साबित होते हैं तो मदर टेरेसा से भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए। (image source-Facebook)

आरएसएस के एक नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने मिशनरीज ऑफ चैरेटी पर लगे बच्चा चोरी के आरोपों के बाद मदर टेरेसा को निशाने पर लिया है। बता दें कि मिशन ऑफ चैरिटीज की शुरुआत भारत रत्न मदर टेरेसा द्वारा ही की गई थी। दिल्ली बेस्ड एक आरएसएस नेता राजीव तुली ने इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा कि यदि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मदर टेरेसा को चैरिटी के कामों के लिए दिया गया भारत रत्न का पुरस्कार वापस ले लेना चाहिए। राजीव तुली के अनुसार, “भारतीय नहीं चाहते कि भारत रत्न पुरस्कार बदनाम हो।”

राजीव तुली ने अपने आरोपों में कहा कि “साल 1980 में मदर टेरेसा को भारत रत्न का पुरस्कार दिया गया था, हालांकि उस वक्त भी ऐसे आरोप लगे थे और अभी भी ऐसे आरोप लगाए गए हैं। यदि ये सही पाए जाते हैं तो हमें मदर टेरेसा के भारत रत्न पुरस्कार पर दोबारा विचार करना चाहिए।” तुली के अनुसार, मदर टेरेसा ने, जिन्हें बीते साल वेटिकन सिटी द्वारा संत की उपाधि दी गई थी, जनकल्याण का कोई काम नहीं किया था और उनका एजेंडा धर्मांतरण ही था। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रामण्यन स्वामी भी आरएसएस नेता राजीव तुली की बात से पूरी तरह सहमत दिखाई दिए।

स्वामी ने कहा कि मैं उनकी (राजीव तुली) बात से 100 प्रतिशत सहमत हूं। स्वामी ने ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हिचेन्स की किताब (द मिशनरीज पोजिशनः मदर टेरेसा इन थ्योरी एंड प्रैक्टिकल) का जिक्र करते हुए बताया कि लेखक ने उनके (मदर टेरेसा) द्वारा किए गए फ्रॉड को डॉक्यूमेंटेड किया हुआ है। भाजपा नेता के अनुसार, यदि आपके पास मदर टेरेसा के अपराधों के कई उदाहरण हैं, तो फिर वह सम्मानित व्यक्ति कैसे हो सकती हैं?

क्या है मामलाः झारखंड की राजधानी रांची स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी में एक बच्चे को 1.2 लाख में बेचने की खबर आयी है, जिस पर विवाद हो गया है। दरअसल एक दंपत्ति ने हाल ही में रांची स्थित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से शिकायत करते हुए बताया था कि चैरिटी के स्टाफ ने उनके बच्चे को उनसे लेकर किसी अन्य दंपत्ति को 14 दिनों का बच्चा 1.2 लाख रुपए में बेच दिया। गौरतलब है कि साल 2014 में भी मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के आरोप लगे थे। हालांकि उस वक्त चैरिटी के विरोध के कारण इस मामले की जांच आगे नहीं बढ़ सकी थी। मिशनरीज ऑफ चैरिटी का नाम एक और विवाद में सामने आ रहा है। दरअसल झारखंड के डीजीपी ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खातों को सीज करने की मांग की है। दरअसल जांच में पता चला है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के 5 संगठनों के खातों में विदेश से करोड़ो रुपए का चंदा आया है। माना जा रहा है कि इस मामले की जांच सीबीआई को भी सौंपी जा सकती है।

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