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घर-घर जाकर RSS का साहित्य बेचने की तैयारी

साहित्य ज्ञान यज्ञ नामक इस कार्यक्रम का आयोजन 20 मार्च को कानपुर प्रांत के 16 जिलों में भी होगा। इन सभी जिलों में प्रत्येक जिले के संघ कार्यकर्ता चार-चार की टोली में संघ का साहित्य बिक्री के लिए सुबह से निकलेंगे। अकेले कानपुर शहर में संघ के करीब 16 हजार स्वयंसेवक हंै। संग का मानना है कि अब आम जनता को भी संघ की विचारधारा और उसके साहित्य से जोड़ने की जरूरत है। संघ अपना साहित्य मुफ्त में नही देता है क्योंकि उसका मानना है कि मुफ्त में मिला कोई भी साहित्य लोग पढ़ते नहीं है। इसीलिए इसकी कीमत बहुत ही कम रखी गई है।

Author कानपुर | March 17, 2016 1:33 AM
राष्ट्रीेय स्वसंसेवक संघ (File Photo)

आम जनता को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और उसका ज्ञान देने के लिए कानपुर शहर के सैकड़ों स्वयंसेवक 20 मार्च को घरों में, रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों, मुख्य बाजारों में संघ के साहित्य की बिक्री करेंगे। इसमें संघ के विचारकों के विचार, महापुरुषों की जीवनियां व राष्ट्र प्रेम से जुड़ी 18 पुस्तकें शामिल हैं। इन पुस्तकों की कीमत 20 रुपए से लेकर सौ रुपए तक है।

साहित्य ज्ञान यज्ञ नामक इस कार्यक्रम का आयोजन 20 मार्च को कानपुर प्रांत के 16 जिलों में भी होगा। इन सभी जिलों में प्रत्येक जिले के संघ कार्यकर्ता चार-चार की टोली में संघ का साहित्य बिक्री के लिए सुबह से निकलेंगे। अकेले कानपुर शहर में संघ के करीब 16 हजार स्वयंसेवक हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत के संघ चालक वीरेंद्र जीत सिंह ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेस में बताया कि संघ की नियमित लगने वाली शाखाओं और उससे जुड़े कार्यक्रमों में तो स्टाल लगा कर संघ का साहित्य स्वयंसेवकों को बेचा जाता था, लेकिन अब आम जनता को भी संघ की विचारधारा और उसके साहित्य से जोड़ने की जरूरत है। इसीलिए यह साहित्य ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम 20 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। इसमें संघ साहित्य की बिक्री घर-घर गली-गली की जाएगी। संघ अपना साहित्य मुफ्त में नही देता है क्योंकि उसका मानना है कि मुफ्त में मिला कोई भी साहित्य लोग पढ़ते नहीं है। इसीलिए इसकी कीमत बहुत ही कम रखी गई है।

उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों में राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान, देश की ज्वलंत समस्याएं और उनके समाधान, आओ जाने भारत, आरएसएस एक परिचय, मां के चरणों में, बाबा साहिब अंबेडकर और अनेक महापुरुषों की जीवनियां शामिल हैं।

इन पुस्तकों में सरसंघ संचालक मोहन राव भागवत, दूसरे सरसंघ संचालक माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर से लेकर महर्षि अरविंद आदि विद्वानों के भाषणों और वक्तव्यों के अंश के रूप में छोटी-छोटी पुस्तके होंगी। ऐसी पुस्तकों की संख्या 18 है।

वीरेंद्र जीत सिंह ने बताया कि कानपुर शहर सहित प्रांत के सभी 16 जिलों में 20 मार्च को संघ के कार्यकर्ता चार चार की टोली में निकलेंगे और मोहल्लों, गलियों, शहर के प्रमुख बाजारों, बस अडडों, रेलवे स्टेशनों पर लोगों को संघ साहित्य के बारे में बताएंगे और उनकी बिक्री भी करेंगे।
प्रेस कांफ्रेंस में संघ के प्रांत प्रचारक मोहन अग्रवाल ने बताया कि कानपुर प्रांत के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों में 2015 में 768 स्थानों में कुल 1,315 शाखाएं थीं, जो 2016 मार्च तक बढ़ कर 785 स्थानों में 1,385 शाखाएं हो गई हैं।

पूरे प्रांत में संघ की शाखाओं में आने वाले स्वंयसेवकों की संख्या लाखों में है। इस समय केवल कानपुर शहर में 310 शाखाएं हैं, जिनसे करीब 16 हजार स्वयंसेवक पूर्ण रूप से जुड़े हैं। इसके अलावा संघ के अलग-अलग कार्यक्रमों में तो हजारों की संख्या में अन्य लोग भी आते हैं।

वीरेंद्रजीत सिंह ने बताया कि अभी हाल ही में नागौर में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सामाजिक विषमताओं पर चिंता जताई गई। आज के समाज में जाति संप्रदाय, वर्ण और जन्म के आधार पर भेदभाव होता है, जो समाप्त होना चाहिए। संघ इस वर्ष को सामाजिक समरसता वर्ष मना रहा है।

सिंह ने कहा कि संघ का गणवेश फुल पैंट कर दिया गया है लेकिन इसे अमल में लाने में अभी कुछ समय लग सकता है। वैसे संघ के खेलकूद और व्यायाम के कार्यक्रमों में अभी भी हाफ पैंट ही चलेंगी। उन्होंने बताया कि कानपुर शहर में करीब 150 अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी संघ से जुड़े है और नियमित रूप से शाखाओं में आते हैं।

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